नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर तो आज के इस आर्टिकल के अंदर हम बात करने वाले हैं पीएम विश्वकर्म योजना क्या है यह योजना क्या होगा इस योजना के अंदर किस-किस व्यक्ति को इस योजना के तहत लाभ मिल सकता है क्यों लाई गई है योजना कब लाई गई योजना इस योजना में कैसे आवेदन करना है क्या रहेगी इसकी जानकारी सारी जानकारी आज के इस आर्टिकल के अंदर हम बात करने वाले हैं तो नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट सरकारी gudd तो आर्टिकल में आगे बढ़े उससे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह आर्टिकल बहुत ही साधारण हिंदी में लिखा गया है जिससे आपको समझने में आसान हो

तो पीएम विश्वकर्म योजना शुरू क्यों की गई इसके ऊपर बात करते हैं तो इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार का बड़ा सही उद्देश्य है कि जो मजदूर है कारीगर है शिल्पकार है जो ऐसे व्यक्ति जिनके पास खुद की कुछ कुशल है और वह आगे नहीं बढ़ पा रहे तो उनकी सहायता करना उनको एक पहचान दिलाना ताकि वह अपने हुनर के थ्रू अपनी स्किल के थ्रू आगे बढ़ पाए इसी के लिए पीएम विश्वकर्म योजना को स्टार्ट किया गया है और इससे उनका लोन और भी औजार वगैरह बहुत सारी सुविधाएं हैं वह प्रदान की जाएगी तो वह कैसे आप ले सकते हो उसके बारे में आज हम बात करने वाले हैं तो हमारे साथ बने रहिए हम आपके पूरे जानकारी देने की कोशिश करेंगे तो चलिए फिर शुरू करते हैं

🌿 विश्वकर्मा योजना का मूल उद्देश्य

दोस्तों, इस योजना का मतलब सिर्फ इतना नहीं है
कि सरकार आपको लोन दे दे और बात खत्म हो जाए।
असल में सरकार यह कहना चाहती है कि
आपका हुनर कीमती है, आपकी मेहनत की इज्जत है।

जो लोग सालों से अपने हाथों से काम कर रहे हैं,
चाहे वो बढ़ई हों, लोहार हों, दर्जी हों या कुम्हार—
सरकार ने ऐसे हर मेहनती इंसान को
“विश्वकर्मा” का दर्जा दिया है।

मतलब आप कोई छोटे आदमी नहीं हैं,
आप वो इंसान हैं जो अपनी कला से
घरों को बनाता है, चीजों को ठीक करता है
और समाज को जोड़कर रखता है।

अब इस योजना में आपको क्या मिलेगा,
वो भी सीधी भाषा में समझ लीजिए—

  • आपको कम ब्याज पर लोन मिलेगा,
    ताकि पैसों की वजह से आपका काम रुके नहीं।
  • आपको ट्रेनिंग दी जाएगी,
    ताकि आप अपना काम और अच्छे तरीके से कर सकें।
  • आपको नए औजार (टूलकिट) मिलेंगे,
    जिससे मेहनत कम लगे और काम ज्यादा अच्छा हो।
  • और सबसे जरूरी,
    आपको कमाई बढ़ाने के मौके मिलेंगे।

ताकि दोस्तों, आपका काम
सिर्फ जैसे-तैसे चलाने के लिए न रह जाए,
बल्कि आगे बढ़े, मजबूत बने
और आपकी मेहनत आपको
एक बेहतर जिंदगी की तरफ ले जाए।

सरकार ने इस योजना के लिए करीब ₹13,000 करोड़ का बड़ा बजट रखा है।
दोस्तों, यह सिर्फ पैसों की बात नहीं है,
बल्कि यह दिखाता है कि सरकार समझती है
कि देश को आगे बढ़ाने में कारीगरों की कितनी बड़ी भूमिका है।

सरल शब्दों में कहें तो सरकार का मकसद बिल्कुल साफ है—
कारीगरों को पैसों के मामले में मजबूत बनाना
और उन्हें नई तकनीक व अच्छे साधनों से जोड़ना।

अब इसका फायदा आपको कैसे मिलेगा,
ये भी दिल से समझिए—

कम ब्याज वाले लोन से कारीगर
नए औजार खरीद सकते हैं,
अपनी छोटी-सी दुकान को बेहतर बना सकते हैं,
काम को आगे बढ़ा सकते हैं
और सबसे जरूरी,
अपने परिवार का आने वाला कल सुरक्षित कर सकते हैं।

यानी यह योजना सिर्फ आज के लिए नहीं है दोस्तों,
यह आपके हुनर और आपके परिवार के
बेहतर भविष्य की नींव रखने के लिए है।

पीएम विश्वकर्म योजना शुरू करने की तारीख

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को एक बहुत ही शुभ और खास दिन पर शुरू किया गया—
17 सितंबर 2023, यानी विश्वकर्मा जयंती के दिन।

दोस्तों, यही वो दिन है जो
सृष्टि के रचयिता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित माना जाता है।
ऐसे पवित्र मौके पर इस योजना की शुरुआत होना
अपने आप में कारीगरों के लिए
सम्मान और उम्मीद दोनों कहता है।

इस घोषणा के बाद बहुत से कारीगरों के मन में
एक नई आस जगी कि
अब उनकी मेहनत को भी पहचान मिलेगी
और उनका काम भी आगे बढ़ पाएगा।

सरकार ने इसके साथ-साथ
इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू कर दी,
ताकि गांव हो या शहर,
देश के किसी भी कोने में रहने वाला कारीगर
आसानी से आवेदन कर सके।

इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट है—
pmvishwakarma.gov.in

जहां से आप घर बैठे
इस योजना से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं
और आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

🕰️ कितने समय तक चलेगी यह योजना?

विश्वकर्मा योजना को शुरुआत में 5 सालों के लिए लागू किया गया है,
यानी 2027–28 तक यह योजना चलेगी।

दोस्तों, इन पाँच सालों में सरकार का इरादा बिल्कुल साफ है—
सिर्फ योजना चलाना नहीं,
बल्कि कारीगरों की जिंदगी में असली बदलाव लाना।

इन वर्षों में सरकार का लक्ष्य है—

  • कारीगरों के हुनर को और बेहतर बनाना,
  • नए रोजगार के मौके तैयार करना,
  • काम से जुड़ा व्यवसायिक प्रशिक्षण देना,
  • जरूरत के समय आर्थिक सहायता पहुंचाना,
  • और कारीगरों को अपने पैरों पर खड़ा करना

ताकि दोस्तों, आने वाले समय में
कारीगर किसी पर निर्भर न रहें,
बल्कि अपने काम और मेहनत से
आत्मनिर्भर बनकर
एक सम्मान भरी जिंदगी जी सकें।

पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य और इसके असली फायदे

देख, इस योजना का असली मकसद हमारे देश के उन कारीगरों का काम आगे बढ़ाना है, जो सालों से अपने हाथों के हुनर से अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। जैसे बुनकर, सुनार, लोहार, कुम्हार, दर्जी, मूर्तियाँ बनाने वाले, कपड़े धोने वाले, माला बनाने वाले, राजमिस्त्री और ऐसे ही कई और पारंपरिक कारीगर।

अब तू खुद ही सोच, इन लोगों का काम हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में कितना जरूरी है। घर बनाना हो, कपड़ा पहनना हो, बर्तन चाहिए हों या पूजा-पाठ की चीजें—सब कुछ इन्हीं के दम पर चलता है। फिर भी सच्चाई ये है कि इन्हें वो मौके नहीं मिल पाते, जो मिलना चाहिए। इसी कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की है।

सरल भाषा में बोलूँ तो सरकार चाहती है—

“कारीगर अच्छा काम करें, ज्यादा काम करें, और ज्यादा लोगों तक उनका काम पहुँचे।”

बस इसी को ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है।

यह कोई छोटी-मोटी योजना नहीं है, भाई।
पूरे देश के लगभग 30 लाख से भी ज्यादा पारंपरिक कारीगरों को इस योजना से फायदा मिलेगा।

मतलब अगर तेरे घर के पास कोई दर्जी है, नाई है, लोहार है, बुनकर है, तो समझ ले उसके लिए ये योजना किसी वरदान से कम नहीं।

अब देख, पहले कारीगरों को डिजिटल दुनिया की उतनी समझ नहीं रहती थी।
लेकिन आज के टाइम में ऑनलाइन मार्केट बहुत बड़ा हो गया है।

तो PM Vishwakarma Yojana में सरकार ये सब देती है:

1. डिजिटल सशक्तिकरण (Digital Empowerment)

कारीगरों को इस योजना के तहत यह भी सिखाया जाएगा कि बदलते समय के साथ अपने काम को आगे कैसे बढ़ाना है। उन्हें बताया जाएगा कि ऑनलाइन अपने काम को लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए, मोबाइल की मदद से अपने सामान का कैटलॉग कैसे बनाया जाए, और Paytm या UPI के जरिए पैसे कैसे लिए जाएँ।

साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि Amazon, Flipkart, Meesho जैसे ऑनलाइन बाजारों का इस्तेमाल कैसे करना है, ताकि उनका सामान ज्यादा लोगों तक पहुँच सके। मतलब साफ है अब उनका काम सिर्फ मोहल्ले या गली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के कोने-कोने में बैठे लोग उनका काम देख भी सकेंगे और खरीद भी सकेंगे।

2. ब्रांड बनाना (Brand Promotion)

सरकार की यह भी कोशिश रहेगी कि कारीगरों के काम को मिलाकर एक तरह का “नेशनल लेवल ब्रांड” बनाया जाए। मतलब ऐसा नाम और पहचान, जिसे सुनते ही लोगों को भरोसा हो कि यह काम सच्चे कारीगर का है।

जैसे तूने खुद देखा होगा, कुछ जगहों के खास प्रोडक्ट अपने आप में मशहूर होते हैं—कहीं की साड़ी, कहीं की मिट्टी की चीजें, तो कहीं का हाथ का बना गहना। उसी तरह सरकार चाहती है कि हमारे कारीगरों के हुनर को भी एक अलग पहचान मिले, ताकि लोग नाम से ही समझ जाएँ कि यह असली और भरोसेमंद काम है।

3. बाजार से जोड़ना (Market Linkage)

ये बात सच में बहुत जरूरी है, भाई। क्योंकि जब तक कारीगर को उसके काम का सही दाम नहीं मिलेगा, तब तक मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता।

इसीलिए सरकार ये सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी कि कारीगर सीधे खरीदारों से जुड़ सकें, उन्हें अपने सामान के अच्छे रेट मिलें और बीच में जो बिचौलिए होते हैं, उनका रोल कम से कम रह जाए। जब सीधा सौदा होगा, तो फायदा भी सीधा कारीगर को मिलेगा और उनकी कमाई अपने आप बढ़ेगी।

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पीएम विश्वकर्मा योजना कौन-कौन लोग इसमें शामिल होंगे

सरकार इस योजना के जरिए सिर्फ कुछ गिने-चुने पेशों की मदद नहीं करना चाहती, बल्कि उन लोगों को भी आगे बढ़ाना चाहती है जिन्हें अक्सर योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

इसमें वे लोग शामिल हैं जो समाज के कमजोर तबकों से आते हैं, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग लोग, ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग, और वे लोग जो ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ सुविधाएँ और संसाधन कम होते हैं—जैसे उत्तर-पूर्वी राज्य, पहाड़ी इलाके या फिर द्वीपों में बसे लोग।

सरकार का मकसद बिल्कुल साफ है हर उस इंसान तक मदद पहुँचाना जो अपने हुनर से मेहनत कर रहा है, लेकिन पैसों, साधनों या सही मौके की कमी की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा।

पीएम विश्वकर्मा सर्टिफिकेट और पहचान पत्र

अब एक बहुत जरूरी बात समझ लेते हैं। इस योजना के तहत हर कारीगर को PM Vishwakarma Certificate और PM Vishwakarma ID Card दिया जाएगा।

दोस्त, इसे ऐसे समझ कि यह उसकी पहचान है। जैसे सरकार खुद कह रही हो
“हाँ, यह व्यक्ति हमारे देश का पारंपरिक कारीगर है और इसे इस योजना के सारे फायदे मिलेंगे।”

इस सर्टिफिकेट पर एक अलग यूनिक डिजिटल नंबर होगा, जो उसी कारीगर से जुड़ा रहेगा। यह पहचान पत्र डिजिटल और फिजिकल, दोनों रूप में दिया जाएगा, ताकि कारीगर कहीं भी जाए, किसी दफ्तर में या किसी काम के लिए, उसे अपनी पहचान साबित करने में कोई परेशानी न हो।

पीएम विश्वकर्मा योजना के मुख्य फायदे

अब मैं तुझे एक-एक करके साफ तरीके से समझाता हूँ कि इस योजना में कारीगरों को आखिर मिलता क्या है। ये कोई मामूली योजना नहीं है, बल्कि कारीगरों के लिए शुरू से लेकर अंत तक पूरा सहारा देने वाला पैकेज है।

सबसे पहले कारीगर को उसकी पहचान मिलती है सरकार की तरफ से सर्टिफिकेट और ID कार्ड, जिससे उसे एक अलग सम्मान और भरोसा मिलता है। इसके बाद उसे नई स्किल सीखने का मौका दिया जाता है, ताकि वह अपने काम को और बेहतर बना सके। काम आसान और तेज हो सके, इसके लिए टूलकिट खरीदने में सरकार मदद करती है। ट्रेनिंग के दौरान रोज़मर्रा के खर्च के लिए रोज़ का भत्ता भी दिया जाता है।

इतना ही नहीं, काम बढ़ाने के लिए कम ब्याज पर लोन की सुविधा मिलती है, डिजिटल पेमेंट का पूरा फायदा सिखाया जाता है और अपने सामान को बेचने के लिए मार्केटिंग में भी मदद की जाती है। ये सारी सुविधाएँ मिलकर कारीगर को ऐसा मजबूत सहारा देती हैं, जिससे उसका काम बस जैसे-तैसे चलता नहीं, बल्कि आगे बढ़ता है और उसे तरक्की का रास्ता दिखता है।

स्किल अपग्रेडेशन, ट्रेनिंग और स्टाइपेंड

अगर कोई कारीगर सालों से एक ही तरीके से काम करता आ रहा हो और अचानक उसे नए औज़ार, नई तकनीक और बेहतर तरीके मिल जाएँ, तो सोचो उसका काम कितना सुधर सकता है। मेहनत वही रहती है, बस तरीका बदल जाता है और नतीजा कई गुना अच्छा हो जाता है।

इसी बात को ध्यान में रखकर इस योजना में शुरुआत से लेकर आगे तक हर तरह का प्रशिक्षण रखा गया है। सबसे पहले कारीगर का एक स्किल टेस्ट लिया जाएगा, ताकि यह समझा जा सके कि उसे कितना और क्या सिखाने की जरूरत है। इसके बाद उसे पाँच से सात दिन की बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग पूरी होने पर उसे सर्टिफिकेट भी मिलेगा।

अगर कारीगर चाहे तो आगे चलकर पंद्रह दिन या उससे ज्यादा की एडवांस ट्रेनिंग भी ले सकता है, जिससे उसका हुनर और निखर सके। सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान कारीगर को रोज़ ₹500 का भत्ता भी दिया जाता है, ताकि सीखते समय उसे पैसों की चिंता न रहे और वह पूरे मन से अपना हुनर आगे बढ़ा सके।

टूलकिट इंसेंटिव

हर कारीगर के हाथ में अच्छे और सही औज़ार हों, यही इस योजना का एक बहुत बड़ा मकसद है। क्योंकि हुनर तभी पूरी तरह निखरता है, जब उसके पास काम करने के अच्छे साधन भी हों।

इसीलिए सरकार इस योजना के तहत ई-वाउचर के जरिए करीब ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता देती है। इसका मतलब यह है कि कारीगर को सीधे पैसे नहीं, बल्कि ऐसे वाउचर मिलते हैं जिनसे वह अपने काम के लिए जरूरी आधुनिक औज़ार खरीद सकता है।

सीधे शब्दों में समझे तो—नई स्किल सीखने के बाद कारीगर के पास नए और अच्छे औज़ार भी होंगे, ताकि वह पहले से ज्यादा अच्छा, तेज और बेहतर काम कर सके।

सस्ते ब्याज पर लोन

इस योजना का यह हिस्सा कारीगरों के लिए सबसे ज्यादा काम आने वाला माना जाता है। क्योंकि अक्सर हुनर तो होता है, लेकिन काम बढ़ाने के लिए पैसों की कमी आड़े आ जाती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले चरण में करीब ₹1 लाख तक का लोन देती है। अगर कारीगर यह लोन समय पर चुका देता है, तो उसे दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का लोन लेने का मौका मिलता है।

इस लोन की मदद से कारीगर अपना काम आगे बढ़ा सकता है, अपनी दुकान को बेहतर बना सकता है, नई मशीनें या औज़ार खरीद सकता है, या फिर अपने काम से जुड़ी किसी और ज़रूरत को पूरा कर सकता है। मतलब साफ है यह लोन कारीगर को पीछे नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का सहारा देता है।

डिजिटल लेन-देन पर प्रोत्साहन

अब सरकार यह भी चाहती है कि कारीगर समय के साथ डिजिटल बनें और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करें। इससे एक तो उनका काम साफ-सुथरा और पारदर्शी रहेगा, और दूसरा ग्राहकों का भरोसा भी अपने आप बढ़ेगा।

इसी को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर डिजिटल पेमेंट पर कारीगर को ₹1 का इंसेंटिव देती है। सुनने में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन जब रोज़ के कई पेमेंट होते हैं और काम बढ़ता है, तो यही छोटी-छोटी रकम मिलकर अच्छी मदद बन जाती है। इससे कारीगर को डिजिटल तरीके अपनाने का भी हौसला मिलता है।

मार्केटिंग सपोर्ट

देख भाई, कारीगर कितना भी अच्छा काम कर ले, अगर उसे सही बाजार ही ना मिले तो मेहनत का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसी बात को समझते हुए इस योजना में मार्केटिंग की भी पूरी मदद रखी गई है।

सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि कारीगर के बनाए हुए उत्पाद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचें, उसे सही खरीदार मिलें और उसका काम सिर्फ गांव या मोहल्ले तक सीमित ना रह जाए। यह मदद देश स्तर की एजेंसियों के जरिए दी जाती है, ताकि कारीगर का हुनर पूरे देश में पहचाना जा सके और उसकी कमाई सच में बढ़ सके।

योजना के फंडिंग मॉडल की सरल व्याख्या

पूरा खर्च सरकार की तरफ से उठाया जाता है। कहीं भी कारीगर को पैसा लगाने की ज़रूरत नहीं होती।

  • ट्रेनिंग, स्किल टेस्ट और स्टाइपेंड – पूरा खर्च MSME मंत्रालय की तरफ से
  • टूलकिट – पूरा खर्च सरकार की तरफ से
  • डिजिटल इंसेंटिव – सरकार देगी
  • मार्केटिंग – सरकार ही करवाएगी
  • लोन पर ब्याज में छूट – सरकार देगी

सरकार यह योजना खुद की जिम्मेदारी पर चलाती है ताकि कारीगर पर कोई बोझ ना पड़े।

पीएम विश्वकर्मा योजना कैसे काम करती है

अब मैं तुझे पूरा प्रोसेस बिल्कुल आसान और सीधे शब्दों में समझाता हूँ, ताकि एक बार पढ़ते ही सब कुछ साफ हो जाए। सबसे पहले कारीगर इस योजना में अपना रजिस्ट्रेशन करता है। रजिस्ट्रेशन के बाद उसकी जानकारी की जांच होती है, जो तीन स्तरों पर की जाती हैपहले ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र में ULB स्तर पर, फिर जिला स्तर पर और उसके बाद राज्य स्तर पर।

जांच के दौरान कारीगर की जानकारी डिजिटल पेमेंट से जुड़ी एजेंसियों को दी जाती है, ताकि उसके नाम पर QR कोड और UPI की सुविधा शुरू की जा सके। इसके बाद कारीगर QR कोड से पेमेंट लेना शुरू करता है और हर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर उसे इंसेंटिव भी मिलता है। इन सभी लेन-देन की जानकारी NPCI के जरिए सरकार तक पहुँचती है, जिससे पूरा सिस्टम पारदर्शी रहता है।

जब सारी जांच पूरी हो जाती है, तो कारीगर को PM विश्वकर्मा सर्टिफिकेट और ID कार्ड जारी किया जाता है। इसके बाद उसे ट्रेनिंग सेंटर भेजा जाता है, जहाँ उसका स्किल टेस्ट होता है और फिर बेसिक व एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग पूरी होने पर कारीगर को टूलकिट के लिए ई-वाउचर मिलता है, ताकि वह अपने काम के लिए जरूरी औज़ार खरीद सके।

इसके बाद लोन की प्रक्रिया शुरू होती है। पहले लोन की किस्त के लिए कारीगर के कागज़ बैंक को भेजे जाते हैं और लोन जारी किया जाता है। अगर कारीगर पहला लोन समय पर चुका देता है, तो उसे दूसरी किस्त का लोन भी मिल जाता है। बैंक से जुड़ी जानकारी NPCI के जरिए वेरिफाइ होती है और साथ ही कारीगर को अपने सामान की बिक्री के लिए मार्केटिंग सपोर्ट भी दिया जाता है।

पूरे प्रोसेस के दौरान कारीगर को डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। कुल मिलाकर यह पूरी प्रक्रिया कारीगर को शुरुआत से लेकर कमाई बढ़ाने तक, हर कदम पर मजबूत सहारा देती है और उसे आगे बढ़ने का पूरा मौका देती है।

विश्वकर्मा योजना में कितना लोन मिलेगा और ब्याज दर क्या होगी?

देख, मैं तुझे बिल्कुल साफ और आसान भाषा में समझाता हूँ। विश्वकर्मा योजना के तहत सरकार कारीगरों और शिल्पकारों को कुल ₹3 लाख तक का लोन देती है, लेकिन यह पूरा पैसा एक साथ नहीं मिलता। यह लोन दो किस्तों में दिया जाता है, ताकि कारीगर धीरे-धीरे अपना काम जमा सके और उस पर बेवजह का दबाव भी न पड़े।

सबसे अच्छी और राहत वाली बात यह है कि यह लोन सरकार सिर्फ 5 प्रतिशत सालाना की बहुत कम ब्याज दर पर देती है। आज के समय में जब बैंक आमतौर पर ज्यादा ब्याज वसूलते हैं, वहाँ 5% ब्याज कारीगरों के लिए सच में बड़ी मदद और सुकून की बात है।

कौशल विकास और रोज़ाना मिलने वाला 500 रुपये का मानदेय

विश्वकर्मा योजना सिर्फ लोन देने तक ही सीमित नहीं है। सरकार चाहती है कि कारीगर समय के साथ नई तकनीक सीखे, अपने काम को और बेहतर बनाए और धीरे-धीरे आगे बढ़े।

इसी सोच के साथ इस योजना में दो तरह की ट्रेनिंग रखी गई है—बेसिक ट्रेनिंग और एडवांस ट्रेनिंग। पहले कारीगर को बेसिक चीजें सिखाई जाती हैं, फिर जरूरत और इच्छा के हिसाब से उसे एडवांस ट्रेनिंग भी दी जाती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान सरकार कारीगर को रोज़ ₹500 देती है। मतलब सीखने के लिए कारीगर को अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, बल्कि सीखते हुए उसे रोज़ की मदद भी मिलती है।

पहला चरण – 1 लाख रुपये का लोन

ट्रेनिंग शुरू होने के बाद कारीगर को पहले चरण में ₹1 लाख तक का लोन दिया जाता है। इस लोन पर ब्याज भी ज्यादा नहीं होता, बल्कि अधिकतम 5 प्रतिशत सालाना ही लिया जाता है।

इस पैसे का इस्तेमाल कारीगर अपने काम को बेहतर बनाने के लिए कर सकता है जैसे छोटे-छोटे जरूरी औज़ार खरीदना, अपनी दुकान को सुधारना, काम का दायरा बढ़ाना या फिर अपने व्यवसाय को ठीक से शुरू करना। मतलब यह लोन कारीगर को अपने पैरों पर खड़ा होने की पहली मजबूत मदद देता है।

दूसरा चरण – 2 लाख रुपये का लोन

जब कारीगर पहला लोन समय पर चुका देता है और उसका काम ठीक तरह से जमने लगता है, तब उसे दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का लोन लेने का मौका मिलता है। इस दूसरे लोन पर भी वही रियायती 5 प्रतिशत ब्याज दर लागू रहती है।

सरकार का मकसद बिल्कुल साफ हैकारीगर पर एक साथ बोझ न पड़े, बल्कि वह धीरे-धीरे अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाए, अपना व्यवसाय बढ़ाए और अपनी कमाई में लगातार इजाफा करे।

लोन चुकाने की अवधि – कितने महीने मिलेंगे?

अब तुझे यह भी जान लेना चाहिए कि लोन चुकाने के लिए सरकार कितना समय देती है। यह समय भी दो चरणों के हिसाब से तय किया गया है। पहले चरण में जो ₹1 लाख तक का लोन मिलता है, उसे चुकाने के लिए कारीगर को 18 महीने का समय दिया जाता है। वहीं दूसरे चरण में मिलने वाले ₹2 लाख तक के लोन को चुकाने के लिए 30 महीने का समय मिलता है।

यह समय बिल्कुल संतुलित रखा गया है, ताकि कारीगर आराम से अपने काम से कमाई भी कर सके और साथ-साथ बिना किसी दबाव के किस्तें भी भरता रहे।

आधुनिक औज़ार खरीदने के लिए 15,000 रुपये की अतिरिक्त मदद

सरकार यह बात अच्छी तरह समझती है कि कारीगर के लिए अच्छे औज़ार कितने जरूरी होते हैं। हुनर तो पहले से होता है, लेकिन सही औज़ार मिल जाएँ तो वही काम और भी बेहतर हो जाता है। इसी वजह से विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों को ₹15,000 तक की अतिरिक्त सहायता दी जाती है, ताकि वे अपने काम के लिए आधुनिक टूलकिट खरीद सकें।

यह सहायता सीधे ई-वाउचर के रूप में दी जाती है और इसका इस्तेमाल सिर्फ औज़ार खरीदने में ही किया जा सकता है। इससे कारीगर के काम में तेजी आती है, गुणवत्ता सुधरती है और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ता है।

इसके साथ-साथ इस योजना में कारीगर को विश्वकर्मा पहचान पत्र और सर्टिफिकेट भी मिलता है, जिससे उसे योजना के सभी फायदे आसानी से मिल जाते हैं। सरकार डिजिटल पेमेंट अपनाने, मार्केटिंग करने और बिज़नेस बढ़ाने में भी उसकी मदद करती है, ताकि कारीगर का काम सिर्फ अपने इलाके तक सीमित न रहे, बल्कि बड़े बाजारों तक पहुँच सके और उसकी कमाई भी बढ़े।

विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

देख, अगर तू विश्वकर्मा योजना का फायदा लेना चाहता है, तो सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि इसकी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन एक बात ध्यान में रखना—यह आवेदन आम लोग खुद से सीधे नहीं भर सकते।

क्योंकि ज्यादातर कारीगरों को ऑनलाइन काम करने की ज्यादा आदत नहीं होती, इसी वजह से सरकार ने पूरी प्रक्रिया CSC यानी कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए रखी है। इससे कारीगरों को किसी तरह की परेशानी न हो और सही तरीके से आवेदन हो सके।

तू चाहे गाँव में रहता हो या शहर में, तेरे आसपास कोई न कोई CSC केंद्र जरूर होगा। बस वहाँ जाकर साफ-साफ कहना है
“मुझे PM Vishwakarma Yojana में आवेदन करना है।”
इसके बाद CSC वाला तुझे आगे की पूरी प्रक्रिया समझा देगा और आवेदन भी कर देगा।

विश्वकर्मा योजना के आवेदन के चार मुख्य चरण

अब मैं तुझे बिल्कुल आसान और सीधी भाषा में बताता हूँ कि आवेदन की प्रक्रिया असल में कैसे चलती है। इसमें सिर्फ चार आसान स्टेप होते हैं, कोई झंझट वाली बात नहीं है।

सबसे पहले मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की वेरीफिकेशन होती है। उसके बाद कारीगर का पंजीकरण किया जाता है। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो PM Vishwakarma Certificate बनता है। इसके बाद आखिरी स्टेप में कारीगर के लिए लोन का आवेदन किया जाता है।

ये सारे काम CSC वाले भाई खुद आराम से कर देते हैं। तुझे बस अपने जरूरी दस्तावेज साथ ले जाने हैं और जो भी सवाल वे पूछें, उसका सही-सही जवाब देना है। बाकी पूरी प्रक्रिया वे खुद संभाल लेते हैं।

CSC से आवेदन करवाना क्यों जरूरी है?

सच बताऊँ तो हमारे देश में बहुत से कारीगर ऐसे हैं जिन्हें मोबाइल या कंप्यूटर चलाने की ज्यादा समझ नहीं होती। किसी को पढ़ना-लिखना कम आता है, तो किसी को वेबसाइट या ऑनलाइन फॉर्म भरने का तरीका नहीं पता होता।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आवेदन की प्रक्रिया सबके लिए आसान बना दी है और कहा है कि सभी आवेदन CSC के जरिए ही जमा किए जाएँ। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि फॉर्म सही तरीके से भरा जाता है, किसी तरह की गलती नहीं होती और कारीगर को बार-बार चक्कर भी नहीं लगाने पड़ते।

विश्वकर्मा योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे होता है?

पहला स्टेप: आधिकारिक वेबसाइट पर जाना

CSC वाला भाई सबसे पहले तुझे लेकर आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in पर जाएगा।
यह वही साइट है जहाँ से सारी जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया शुरू होती है।

दूसरा स्टेप: “How to Register” वाले विकल्प पर क्लिक

वेबसाइट पर पहुँचने के बाद होमपेज पर ही How to Register का लिंक दिखेगा।
CSC वाला उस पर क्लिक करेगा।

तीसरा स्टेप: “Artisan” टैब चुनना

How to Register खोलने पर एक नया पेज खुलेगा, जिसमें अलग-अलग विकल्प होंगे।
यहाँ से Artisan वाला टैब चुनना होता है, क्योंकि योजना कारीगरों के लिए ही बनी है।

चौथा स्टेप: PDF में पूरी जानकारी पढ़ना

Artisan पर क्लिक करने के बाद एक PDF खुलती है जिसमें यह बताया गया है कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, किन चीजों की जरूरत पड़ेगी, और आवेदन किन चरणों से गुजरता है।
CSC केंद्र वाले इसी PDF में दिए निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया करते हैं।

क्या खुद से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं?

अब यह सवाल लगभग हर किसी के मन में आता है—
“क्या मैं खुद से वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकता हूँ?”

इसका जवाब बिल्कुल साफ है—नहीं

विश्वकर्मा योजना में खुद से आवेदन करना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें कई तरह की चीजें होती हैं, जैसे वेरीफिकेशन, दस्तावेज अपलोड करना, फोटो लेना, बैंक की जानकारी भरना और कुछ टेक्निकल प्रोसेस। ये सारे काम CSC केंद्र के प्रशिक्षित लोग ही सही तरीके से कर सकते हैं।

इसीलिए सरकार ने साफ कहा है कि इस योजना में आवेदन CSC सेंटर के जरिए ही कराया जाए। यही तरीका सबसे सुरक्षित है और इसी से यह सुनिश्चित होता है कि आवेदन सही ढंग से हो और बाद में किसी तरह की परेशानी न आए।

CSC Registration Guidelines PDF

विश्वकर्मा योजना 2025 की अंतिम तारीख क्या है?

देख, इस योजना की सबसे अच्छी और राहत वाली बात यही है कि सरकार ने इसके लिए कोई पक्की आखिरी तारीख तय नहीं की है। मतलब ऐसा नहीं है कि आज मौका छूट गया तो फिर कुछ नहीं मिलेगा।

सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि आप 2027–28 के वित्तीय वर्ष तक कभी भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि हर कारीगर को आराम से समय मिले और किसी को भी जल्दबाज़ी या दबाव में आकर फॉर्म न भरना पड़े।

सीधी और आसान भाषा में समझे तो जब भी आप तैयार हों, आपके दस्तावेज पूरे हों और आप CSC सेंटर जा सकें, तब आप आराम से इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

विश्वकर्मा योजना के लिए पात्रता – कौन आवेदन कर सकता है?

अब मैं तुझे बिल्कुल आसान और साफ शब्दों में समझाता हूँ कि आखिर कौन लोग इस योजना का फायदा ले सकते हैं। सरकार इसमें उन्हीं लोगों को शामिल करती है, जो सच में अपने हाथों के हुनर से मेहनत करके काम करते हैं।

इस योजना में वही व्यक्ति शामिल हो सकता है जो हाथ और औज़ारों से काम करता हो और अपने परिवार की पारंपरिक कला या काम से जुड़ा हो। उसका काम असंगठित क्षेत्र में होना चाहिए, यानी वह किसी बड़ी कंपनी या सरकारी नौकरी में न हो, बल्कि खुद का छोटा-मोटा काम करके रोज़ी-रोटी चलाता हो। आवेदन करते समय उसकी उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और जिस काम के लिए वह आवेदन कर रहा है, उसी काम में वह पहले से लगा हुआ हो।

इसके अलावा, उस व्यक्ति ने पहले केंद्र या राज्य सरकार की किसी ऐसी योजना से लोन का फायदा नहीं लिया होना चाहिए जो इसी तरह की हो। खासकर पिछले पाँच सालों में PMEGP, PM Swanidhi या Mudra Loan का लाभ लिया हो, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। एक परिवार से सिर्फ एक ही सदस्य इस योजना का फायदा ले सकता है, यानी पति, पत्नी और अविवाहित बच्चों में से कोई एक। जो लोग सरकारी नौकरी में हैं या जिनके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी है, वे इस योजना में शामिल नहीं हो सकते।

सीधी और सरल भाषा में कहें तो यह योजना उन्हीं कारीगरों के लिए है, जो अपने हाथों से काम करके परिवार चलाते हैं और अब अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन सही मौके और सहारे की तलाश में हैं।

विश्वकर्मा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज़

अब बात करते हैं उन कागज़ों की, जो रजिस्ट्रेशन करते समय लगते हैं । ये दस्तावेज इसलिए जरूरी होते हैं ताकि CSC सेंटर आपकी सही पहचान, पता और आपके काम को सरकार के सामने ठीक तरह से साबित कर सके।

रजिस्ट्रेशन के समय आम तौर पर ये दस्तावेज मांगे जाते हैं आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक का विवरण और राशन कार्ड। इनके बिना आवेदन पूरा नहीं हो पाता।

इसके अलावा कुछ मामलों में CSC सेंटर आपसे कुछ अतिरिक्त कागज़ भी मांग सकता है, जैसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता का प्रमाण पत्र, आपके हुनर या काम से जुड़ा अनुभव प्रमाण पत्र, या फिर व्यवसाय से जुड़े कोई दस्तावेज, अगर आपके पास हों।

ये सारे कागज़ हर व्यक्ति से नहीं मांगे जाते। यह आपके राज्य और मंत्रालय की जरूरतों पर निर्भर करता है। एक बात ध्यान रखना योजना का फायदा तभी मिलेगा जब आप सभी पात्रता शर्तें पूरी करते हों और जो भी जानकारी दी जाए, वह सही और सच्ची हो।

विश्वकर्मा योजना – किन-किन को मिलेगा फायदा?

अब सबसे जरूरी और काम की बात समझ ले, भाई। सवाल यही आता है कि आखिर इस योजना का फायदा किन कारीगरों को मिलेगा। तो सरकार ने इसमें साफ-साफ बताया है कि 18 पारंपरिक कारीगरी वाले काम इस योजना में शामिल किए गए हैं।

सीधी भाषा में कहूँ तो, अगर तू इन कामों में से किसी एक काम से भी जुड़ा हुआ है, तो समझ ले कि यह योजना तेरे ही लिए बनाई गई है

इन कामों में बढ़ई का काम करने वाले, नाव बनाने वाले, कवच या हथियार से जुड़ा काम करने वाले, लुहार, हथौड़ा और औज़ार बनाने वाले, ताले बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तियाँ बनाने वाले, पत्थर तराशने या तोड़ने वाले, जूता बनाने वाले चर्मकार, राजमिस्त्री, टोकरी-चटाई-झाड़ू या नारियल से चीजें बनाने वाले, गुड़िया और पारंपरिक खिलौने बनाने वाले, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर शामिल हैं।

मतलब साफ है, भाई—अगर तू अपने हाथों से मेहनत करके ऐसा कोई पारंपरिक काम करता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है, तो सरकार तुझे पहचान देना चाहती है, सहारा देना चाहती है और आगे बढ़ने का पूरा मौका देना चाहती है।

Last Words

PM Vishwakarma Yojana: पीएम विश्वकर्मा योजना भारत भर के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक बड़ा बदलाव है। कौशल विकास, वित्तीय सहायता और आवश्यक उपकरण प्रदान करके, यह योजना सुनिश्चित करती है कि कारीगर अपने शिल्प का अभ्यास जारी रख सकें और साथ ही देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान दे सकें।

मैंने इस आर्टिकल में आपको जानकारी दे दी है। यदि आपको हमारी इनफॉरमेशन अच्छी लगी हो तो हमारे दूसरे आर्टिकलको भी पढ़ सकते हो। और मुझे कमेंट करके जरूर बताना कि आपको यह इनफॉरमेशन के तहत आपको लोन मिला या नहीं धन्यवाद।

Disclaimer: ये वेबसाइट पीएम विश्वकर्मा योजना की ऑफिसियल वेबसाइट नहीं है और ना ही इस वेबसाइट का किसी भी सरकारी विभाग से कोई संबंध है। बल्कि ये वेबसाइट बस पीएम विश्वकर्मा योजना की जानकारी देने के लिए उपयोगकर्ताओं की मदद हेतु बनाई गई है। जबकि योजना की ऑफिसियल वेबसाईट https://pmvishwakarma.gov.in है।