पीएम श्री स्कूल योजना क्या है
आपको सबसे पहले इस योजना की नींव समझनी होगी। यह भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका पूरा नाम पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 सितंबर 2022 को इसे मंजूरी दी। सरकार इस योजना में नए स्कूल नहीं बनाती है। वे आपके शहर और गांव के मौजूदा स्कूलों को चुनते हैं। वे इन स्कूलों को आधुनिक बनाते हैं। सरकार का लक्ष्य 14500 से अधिक स्कूलों को अपग्रेड करना है। यह प्रोजेक्ट 5 साल तक चलेगा। इसका कुल बजट 27360 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार 18128 करोड़ रुपये देती है। बाकी खर्च राज्य सरकार उठाती है। आप इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर देखेंगे।
भारत के शिक्षा सिस्टम में भूमिका
भारतीय शिक्षा को एक मॉडल की जरूरत थी। पीएम श्री स्कूल वह मॉडल बनते हैं। ये स्कूल अपने इलाके में लीडर की भूमिका निभाते हैं। ये अपने पड़ोस के अन्य स्कूलों को रास्ता दिखाते हैं। आप यहाँ केवल किताबें नहीं देखेंगे। आप यहाँ स्मार्ट क्लासरूम देखेंगे। यहाँ बच्चों के लिए आधुनिक लैब होंगी। खेल का मैदान होगा। पीएम श्री स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। ये स्कूल रटने की जगह समझने पर जोर देते हैं। इनका उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है।
योजना की शुरुआत और राजनीतिक जीत
इस योजना का सफर आसान नहीं था। केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद थे। दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों ने शुरुआत में दूरी बनाई। केंद्र ने नियमों के तहत समग्र शिक्षा अभियान का फंड रोका। इससे स्कूलों के विकास पर असर पड़ा। बाद में छात्रों का हित जीता। दिल्ली सरकार ने केंद्र के साथ एमओयू साइन किया। यह फैसला राजनीति से ऊपर था। अब इन राज्यों के सरकारी स्कूलों में भी पीएम श्री की सुविधाएं मिलेंगी। आपको 2026 तक इन स्कूलों में बड़ा बदलाव दिखेगा। यह छात्रों के भविष्य की जीत है।
एनईपी 2020 और पीएम श्री योजना का गठजोड़
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक विजन है। पीएम श्री स्कूल उस विजन का परिणाम हैं। एनईपी 2020 को लागू करने के लिए ये स्कूल प्रयोगशाला का काम करते हैं। यहाँ पढ़ाई का पुराना ढर्रा नहीं चलता। यहाँ 5+3+3+4 का नया स्ट्रक्चर लागू होता है। आपको यहाँ वोकेशनल ट्रेनिंग मिलेगी। आप अपनी मातृभाषा में सीख सकेंगे। यहाँ आर्ट्स और साइंस के बीच की दीवार खत्म हो गई है। पीएम श्री स्कूल यह साबित करते हैं कि सरकारी स्कूल भी प्राइवेट स्कूलों से बेहतर हो सकते हैं।
योजना का ऐतिहासिक और नीतिगत संदर्भ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का PM SHRI से कनेक्शन
आप अक्सर सुनते होंगे कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों पर अच्छी लगती हैं। पीएम श्री स्कूल योजना इस सोच को बदलने के लिए है। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रयोगशाला है। सरकार ने नीति बनाई। अब उसे लागू करने के लिए मॉडल की जरूरत है। पीएम श्री स्कूल वही मॉडल हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य रट्टा मारने वाली पढ़ाई को खत्म करना है। पीएम श्री स्कूलों में आप इसे हकीकत बनते देखेंगे। यहां किताबें कम और अनुभव ज्यादा होंगे। यह 5+3+3+4 के नए ढांचे को लागू करने वाला पहला कदम है। आप इन स्कूलों को सिर्फ इमारत नहीं मान सकते। ये आधुनिक शिक्षा के पावरहाउस हैं। सरकार चाहती है कि बाकी स्कूल इन्हें देखें और इनसे सीखें।
भारत में स्कूल सुधारों की पृष्ठभूमि
भारत में शिक्षा सुधारों का इतिहास पुराना है। आजादी के बाद 1968 में पहली शिक्षा नीति आई। उसके बाद 1986 में दूसरी नीति आई। लगभग 34 साल तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। पुरानी नीतियों ने स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। अब फोकस बदल गया है। अब जोर संख्या पर नहीं गुणवत्ता पर है।
समग्र शिक्षा अभियान ने पहले ही एक आधार तैयार किया था। इसमें सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को मिलाया गया। पीएम श्री इसी नींव पर खड़ा है। यह सुधारों की अगली कड़ी है। पहले स्कूल केवल एक ढांचा थे। अब स्कूल एक संसाधन हैं। आप देखेंगे कि कैसे पुराने स्कूल नई तकनीक से लैस हो रहे हैं।
पिछले पांच वर्षों में शिक्षा के बदलाव
पिछले पांच सालों में आपने शिक्षा में बड़े बदलाव देखे होंगे। ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट क्लास ने ले ली है। बस्ते का बोझ कम करने के लिए जादुई पिटारा जैसी पहल शुरू हुई। सरकार ने खेल और पढ़ाई को एक साथ जोड़ा है। रट्टा मारने की जगह समझने पर जोर है।
राजनीतिक खींचतान भी रही। केंद्र और कुछ राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों ने पहले आनाकानी की। फंड रुके। लेकिन छात्रों के भविष्य के लिए सहमति बनी। दिल्ली सरकार ने एमओयू साइन किया। यह छात्रों की जीत है। अब राजनीति पीछे है और पढ़ाई आगे। शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को साथ लाने के लिए काफी मेहनत की। इसका सीधा फायदा आपके बच्चों को मिलेगा।
पीएम श्री योजना का 2026 तक विस्तार व लक्ष्य
सरकार ने 2026-27 तक का लक्ष्य रखा है। इस दौरान देश भर में 14500 से अधिक पीएम श्री स्कूल तैयार होंगे। इस पर 27360 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें केंद्र सरकार 18128 करोड़ रुपये देगी। यह पैसा पांच साल में खर्च होगा।
लक्ष्य साफ है। 2026 तक ये स्कूल अपने क्षेत्र के लीडर बन जाएंगे। ये आस-पास के स्कूलों को रास्ता दिखाएंगे। आप इन स्कूलों में आधुनिक लैब देखेंगे। यहां वर्चुअल रियलिटी और कोडिंग की सुविधाएं होंगी। 2026 के बाद राज्यों को इन स्कूलों की जिम्मेदारी लेनी होगी। केंद्र सरकार शुरुआत में हाथ पकड़ रही है। बाद में राज्यों को ही इसे चलाना है। चयन प्रक्रिया कठिन है। यह चैलेंज मोड में होता है। स्कूल खुद को साबित करते हैं तब उन्हें चुना जाता है। यह प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता को बढ़ाती है।
• योजना 2022 से शुरू होकर 2026-27 तक चलेगी। • कुल 14500 स्कूलों का चयन चार चरणों में होगा। • चयन के लिए स्कूलों को कड़े मानकों को पूरा करना होगा। • 20 लाख से अधिक छात्र सीधे लाभान्वित होंगे। • राज्यों को 2026 के बाद बेंचमार्क बनाए रखना होगा।
PM SHRI योजना के मुख्य उद्देश्य
सरकार ने पीएम श्री योजना को कुछ ठोस और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ शुरू किया है। इसका मकसद पुरानी और थकी हुई शिक्षा व्यवस्था को बदलना है। आप यहाँ इन उद्देश्यों को विस्तार से समझें।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना
शिक्षा का असली मतलब सिर्फ पास होना नहीं है। इसका मतलब ज्ञान को समझना है। पीएम श्री स्कूल रटने की पुरानी आदत को खत्म करते हैं। आप देखेंगे कि यहाँ बच्चे तोता नहीं बनते। वे विषयों की गहराई में जाते हैं। यह स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह लागू करते हैं। यहाँ पढ़ाई का स्तर बहुत ऊंचा रखा गया है। शिक्षक सिर्फ किताब नहीं पढ़ाते। वे नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। आपका बच्चा यहाँ वैश्विक स्तर की शिक्षा पाता है। उसे रटने की जरूरत नहीं पड़ती। वह चीजों को समझकर सीखता है।
समावेशी और समतामूलक अध्ययन वातावरण
हर बच्चे को आगे बढ़ने का बराबर हक है। पीएम श्री स्कूल इसी विचार पर टिके हैं। यहाँ अमीर या गरीब का कोई भेद नहीं होता। लड़के और लड़कियों को समान अवसर मिलते हैं। स्कूल का माहौल पूरी तरह सुरक्षित है। विशेष जरूरतों वाले बच्चों पर यहाँ खास ध्यान दिया जाता है। आप अपने बच्चे को यहाँ भेजकर निश्चिंत रह सकते हैं। स्कूल के दरवाजे हर तरह के छात्र के लिए खुले हैं। यहाँ उसे सम्मान मिलता है। उसे सुरक्षा मिलती है। कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस नहीं करता।
शिक्षार्थी-केंद्रित और अनुभवात्मक सीखने पर जोर
सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर चौक घिसना पढ़ाई नहीं है। बच्चों को खुद प्रयोग करके देखना चाहिए। पीएम श्री स्कूलों में ‘जादुई पिटारा’ जैसी नई चीजें हैं। बच्चे खिलौनों और पहेलियों के जरिए सीखते हैं। इसे अनुभवात्मक शिक्षण कहते हैं। यहाँ शिक्षक सिर्फ लेक्चर नहीं देते। वे बच्चों के साथ मिलकर काम करते हैं। पढ़ाई एक बोझ नहीं रहती। यह मजेदार बन जाती है। बच्चा स्कूल आने से डरता नहीं है। वह स्कूल आने के लिए उत्साहित रहता है। यहाँ बच्चे सवाल पूछते हैं। वे जवाब रटते नहीं हैं। वे जवाब खोजते हैं।
डिजिटल शिक्षा के लिए आधार तैयार करना
आज का युग तकनीक का है। पीएम श्री स्कूल आपके बच्चे को आने वाले समय के लिए तैयार करते हैं। यहाँ सिर्फ किताबें नहीं हैं। यहाँ स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा है। कंप्यूटर लैब में आधुनिक मशीनें लगी हैं। बच्चे कोडिंग सीखते हैं। वे इंटरनेट का सही और सुरक्षित इस्तेमाल जानते हैं। तकनीक यहाँ सिर्फ एक विषय नहीं है। यह पढ़ाई का एक अहम हिस्सा है। आपका बच्चा डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास के साथ कदम रखता है। उसे कंप्यूटर चलाने के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
PM SHRI के तहत क्या बदलता है?
पूर्व-मौजूदा स्कूलों का PM SHRI में अपग्रेडेशन
आप नए स्कूलों का निर्माण नहीं देखते हैं. सरकार पुराने स्कूलों को ही चुनती है. यह चयन एक चैलेंज मोड के जरिए होता है. स्कूल खुद को साबित करते हैं. आप अपने पड़ोस के स्कूल में बदलाव देखते हैं. पैसा सीधे स्कूल के ढांचे को सुधारने में लगता है. दीवारें और इमारतें सीखने का हिस्सा बनती हैं. इसे बाला या ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ कहते हैं. छात्र सुरक्षित और साफ वातावरण में पढ़ते हैं.
स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लैब्स का विकास
आप कक्षा में चाक और डस्टर नहीं देखते. उनकी जगह स्मार्ट बोर्ड लेते हैं. हर क्लास में इंटरनेट की सुविधा होती है. शिक्षक वीडियो और एनिमेशन का उपयोग करते हैं. आप जटिल विषयों को आसानी से समझते हैं. डिजिटल लाइब्रेरी से किताबें मिलती हैं. बच्चे तकनीक के साथ सहज होते हैं. यह रटने की आदत को खत्म करता है.
विज्ञान, गणित और कम्प्यूटर लैब्स
आप विज्ञान को किताबों से बाहर निकलते हुए देखते हैं. स्कूलों में पूरी तरह सुसज्जित विज्ञान लैब्स होती हैं. भौतिकी और रसायन विज्ञान के लिए अलग जगह होती है. गणित को प्रयोगों से समझाया जाता है. आप कंप्यूटर लैब में कोडिंग सीखते हैं. अटल टिंकरिंग लैब में नई चीजें बनाई जाती हैं. बच्चे रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग का अनुभव लेते हैं. विचार हकीकत में बदलते हैं.
पैदल-आधारित, खेल-आधारित और कौशल-आधारित शिक्षा
आप भारी बस्तों का बोझ कम होते देखते हैं. पढ़ाई का तरीका बदलता है. बच्चे खिलौनों और पहेलियों से सीखते हैं. जादुई पिटारा जैसे टूल्स का इस्तेमाल होता है. शिक्षक भाषण नहीं देते बल्कि चर्चा करते हैं. आप बच्चों को सवाल पूछते हुए देखते हैं. हर बच्चे की अलग कला को पहचाना जाता है. व्यावसायिक शिक्षा कक्षा 6 से शुरू होती है. बच्चे हुनर सीखते हैं.
जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, हरित पहलें और पर्यावरण शिक्षा
स्कूल अपनी बिजली खुद बनाता है. आप छतों पर सोलर पैनल देखते हैं. बारिश का पानी जमा किया जाता है. इसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग कहते हैं. स्कूल में प्लास्टिक का उपयोग कम होता है. एलईडी लाइट से बिजली बचती है. आप स्कूल के बगीचे में बच्चों को पौधे लगाते देखते हैं. इसे पोषण वाटिका कहते हैं. बच्चे प्रकृति की इज्जत करना सीखते हैं.
चयन प्रक्रिया
PM SHRI स्कूलों का चयन एक कठिन परीक्षा जैसा है। सरकार सीधे किसी स्कूल को पैसा नहीं देती। आपको इसके लिए मेहनत करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। इसमें केवल वे स्कूल चुने जाते हैं जो बदलाव के लिए तैयार हैं।
चैलेंज मोड से चयन कैसे होता है
सरकार ने इसके लिए चैलेंज मोड का उपयोग किया है। यह तीन स्पष्ट चरणों में काम करता है।
चरण 1 सबसे पहले राज्य सरकार केंद्र के साथ समझौता करती है। इसे एमओयू कहते हैं। बिना इसके प्रक्रिया शुरू नहीं होती।
चरण 2 इसके बाद सरकार UDISE+ डेटा का उपयोग करती है। यह डेटा स्कूलों की पुरानी जानकारी देता है। इससे योग्य स्कूलों की एक शुरुआती लिस्ट बनती है।
चरण 3 यह सबसे मुख्य चरण है। स्कूल खुद को साबित करने के लिए आवेदन करते हैं। वे बताते हैं कि वे शर्तें पूरी करेंगे। निरीक्षण टीम दावों की जाँच करती है। अगर आपका स्कूल मानकों पर खरा उतरता है तो ही उसका चयन होता है।
UDISE+ डेटा की भूमिका
UDISE+ डेटा चयन का आधार है। यह डेटाबेस स्कूलों की हर छोटी जानकारी रखता है। सरकार इसी डेटा से देखती है कि स्कूल के पास अपनी इमारत है या नहीं। यह भी देखा जाता है कि सुरक्षा के इंतजाम कैसे हैं। अगर आपका डेटा सही नहीं है तो आप दौड़ से बाहर हो जाते हैं। सटीकता ही सफलता की कुंजी है।
राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश की ज़िम्मेदारी
राज्यों का काम केवल हस्ताक्षर करना नहीं है। उन्हें ये स्कूल चलाने हैं। केंद्र सरकार 2026 तक मदद करेगी। उसके बाद सारी जिम्मेदारी राज्य की होगी। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा का स्तर नीचे न गिरे। बेंचमार्क बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है।
राज्य स्तर पर चुनौतियाँ और विवाद
शुरुआत में सब कुछ आसान नहीं था। कुछ राज्यों ने इस योजना का विरोध किया। दिल्ली और पंजाब ने पहले एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके कारण केंद्र ने समग्र शिक्षा अभियान का फंड रोक दिया। यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना। लेकिन अंत में छात्रों के हित की जीत हुई। दिल्ली सरकार ने अब हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया है। यह फैसला बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करता है। राजनीति अपनी जगह है और शिक्षा अपनी जगह। अब इन राज्यों के बच्चों को भी आधुनिक लैब और स्मार्ट क्लास का लाभ मिलेगा।
बजट और वित्त पोषण
पीएम श्री योजना का बजट बहुत विशाल है। सरकार ने शिक्षा के ढांचे को बदलने के लिए एक बड़ा फंड तैयार किया है। आपको यह जानना जरूरी है कि यह पैसा कहां से आता है और कैसे खर्च होता है।
कुल परियोजना लागत
सरकार ने 5 साल की अवधि के लिए कुल 27360 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह बजट वर्ष 2022 से वर्ष 2027 तक के लिए है। इसमें केंद्र सरकार सबसे बड़ा हिस्सा देती है। केंद्र का कुल योगदान 18128 करोड़ रुपये है। बाकी बची हुई रकम राज्यों को देनी होती है। यह भारी निवेश सीधे आपके बच्चों की कक्षाओं और प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने में लगेगा।
केंद्र और राज्य का योगदान पैटर्न
भारत के अधिकांश राज्यों में खर्च को साझा किया जाता है। इसके लिए सरकार ने 60 और 40 का अनुपात तय किया है।
• केंद्र सरकार कुल खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा देती है। • राज्य सरकार को अपनी तरफ से 40 प्रतिशत मिलाना होता है। • यह साझेदारी सुनिश्चित करती है कि राज्य सरकारें भी जिम्मेदारी लें। • आप अपने राज्य के बजट में इस हिस्सेदारी की मांग कर सकते हैं।
पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए अलग पैटर्न
पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में चुनौतियां ज्यादा होती हैं। वहां निर्माण और सुविधाएं पहुंचाना महंगा पड़ता है। सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए नियमों में ढील दी है।
• पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाती है। • हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में भी केंद्र 90 प्रतिशत देता है। • जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को भी 90 प्रतिशत केंद्रीय मदद मिलती है। • वहां की राज्य सरकारों को केवल 10 प्रतिशत खर्च करना होता है। • जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है वहां केंद्र सरकार पूरा 100 प्रतिशत खर्च करती है।
वित्तीय प्रबंधन और वितरण नीतियाँ
पैसा सही जगह पहुंचे यह सबसे जरूरी है। सरकार ने फंड जारी करने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। हर राज्य को शिक्षा मंत्रालय के साथ एक लिखित समझौता करना होता है।
• राज्यों को केंद्र के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। • जो राज्य यह समझौता नहीं करते उनका फंड रोक दिया जाता है। • दिल्ली और पंजाब ने शुरुआत में इस योजना को नहीं अपनाया था। • इसके कारण केंद्र ने उनकी पुरानी ग्रांट रोक दी थी। • बाद में उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए हस्ताक्षर कर दिए। • अब पैसा पारदर्शी तरीके से जारी होता है। • यह सुनिश्चित किया जाता है कि पैसा सीधे स्कूल के विकास कार्यों में ही लगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएँ
पीएम श्री स्कूलों का ढांचा पुराना नहीं है। सरकार ने इन्हें पूरी तरह आधुनिक बनाया है। आप इन स्कूलों में प्रवेश करते ही बदलाव महसूस करते हैं। यहाँ की दीवारें और कमरे भी सिखाने का काम करते हैं। इसे बाला या बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड कहते हैं। आपको यहाँ सिर्फ पढ़ाई नहीं मिलती। आपको एक बेहतर वातावरण मिलता है।
सुसज्जित क्लासरूम और Labs
क्लासरूम अब स्मार्ट हो गए हैं। आप चॉक और डस्टर की जगह डिजिटल बोर्ड देखते हैं। हवादार कमरों में रोशनी का पूरा प्रबंध है। फर्नीचर बच्चों के लिए आरामदायक है। विज्ञान की पढ़ाई सिर्फ किताबों में नहीं होती। स्कूलों में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं। आप फिजिक्स और केमिस्ट्री के प्रयोग खुद करते हैं। अटल टिंकरिंग लैब नवाचार का केंद्र है। आप यहाँ नई चीजें बनाना सीखते हैं। रटने की आदत यहाँ खत्म होती है। प्रयोग करके सीखना ही यहाँ का नियम है।
लाइब्रेरी और डिजिटल संसाधन
पुस्तकालय में किताबों का भंडार है। आपको हर विषय पर जानकारी मिलती है। छोटे बच्चों के लिए जादुई पिटारा रखा गया है। यह खेल और कहानियों के जरिए सिखाता है। डिजिटल संसाधन आपकी पढ़ाई को आसान बनाते हैं। आप इंटरनेट के जरिए दुनिया से जुड़ते हैं। टैबलेट और ई-बुक्स का उपयोग आम है। जानकारी अब आपकी उंगलियों पर है। शिक्षक आपको सही जानकारी खोजने में मदद करते हैं।
खेल और शारीरिक शिक्षा सुविधाएँ
खेल का मैदान बड़ा और साफ है। यहाँ खेलने के लिए आधुनिक उपकरण हैं। शारीरिक शिक्षा को पढ़ाई के बराबर महत्व मिलता है। आप वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेल खेलते हैं। योग और व्यायाम के लिए अलग जगह है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग रहता है। स्कूल आपकी फिटनेस पर पूरा ध्यान देता है। आप यहाँ टीम में काम करना सीखते हैं।
कम्प्युटर और ICT उपकरण
तकनीक आज की जरूरत है। स्कूलों में हाई-टेक कंप्यूटर लैब हैं। हर छात्र को कंप्यूटर चलाने का मौका मिलता है। आप कोडिंग और सॉफ्टवेयर की जानकारी लेते हैं। स्मार्ट क्लासरूम में वीडियो के जरिए पाठ समझाए जाते हैं। शिक्षक आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करते हैं। पढ़ाई अब इंटरैक्टिव है। आप तकनीक से डरते नहीं हैं। आप उसका इस्तेमाल करना सीखते हैं।
Green Campus Initiatives
पीएम श्री स्कूल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हैं। स्कूल अपनी बिजली सौर ऊर्जा से बनाता है। छतों पर सोलर पैनल लगे हैं। बारिश का पानी बेकार नहीं जाता। जल संरक्षण प्रणाली इसे जमा करती है। आप पानी की कीमत समझते हैं। स्कूल में प्लास्टिक का उपयोग कम होता है। कचरे का सही प्रबंधन किया जाता है। परिसर में पेड़-पौधे लगाए गए हैं। आप प्रकृति के करीब रहते हैं।
PM SHRI स्कूलों का भविष्य
यह स्कूल शिक्षा का नया मॉडल है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जीता जागता उदाहरण है। आसपास के स्कूल इससे प्रेरणा लेते हैं। आप यहाँ भविष्य के लिए तैयार होते हैं। यह सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह बदलाव की एक शुरुआत है। 2026 तक ये स्कूल पूरी तरह विकसित हो जाएंगे। आप यहाँ 21वीं सदी के कौशल सीखते हैं।
सिखाने की पद्धति और पाठ्यक्रम सुधार
शिक्षा का तरीका बदल रहा है। पीएम श्री स्कूल पुरानी रटंत विद्या को खत्म करते हैं। यहाँ जोर रटने पर नहीं है। यहाँ जोर समझने पर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बड़ा बदलाव आया है। आप इन स्कूलों में पढ़ाई का नया रूप देखेंगे।
अनुभवात्मक और पूछताछ-आधारित शिक्षण
आप किताबों से ज्यादा खुद करके सीखते हैं। पीएम श्री स्कूल इसी बात को समझते हैं। यहाँ पढ़ाई गतिविधियों पर आधारित होती है। शिक्षक केवल लेक्चर नहीं देते। वे आपसे सवाल पूछते हैं। आप खुद जवाब खोजते हैं। इसे पूछताछ-आधारित शिक्षण कहते हैं। विज्ञान केवल लैब में नहीं होता। विज्ञान आपके आसपास होता है। आप पौधों को देखकर बायोलॉजी सीखते हैं। आप मिट्टी छूकर भूगोल समझते हैं। यह तरीका पढ़ाई को बोझिल नहीं बनाता।
बहुभाषा शिक्षा और भाषा कौशल पर जोर
भाषा समझने का साधन है। यह बाधा नहीं होनी चाहिए। पीएम श्री स्कूल मातृभाषा को महत्व देते हैं। आप अपनी भाषा में जल्दी सीखते हैं। शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई स्थानीय भाषा में होती है। इससे आपकी नींव मजबूत होती है। अंग्रेजी भी सिखाई जाती है। उसका दबाव नहीं होता। आप कई भाषाएं सीखते हैं। इससे आपका दिमाग तेज होता है। आप अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं।
21वीं सदी के कौशल और करियर-फोकस्ड शिक्षा
आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। पुरानी पढ़ाई से काम नहीं चलेगा। आपको नई चीजें सीखनी होंगी। पीएम श्री स्कूल आपको भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
• आप कोडिंग सीखते हैं।
• आप डेटा को समझना सीखते हैं।
• आप टीम में काम करना सीखते हैं।
• आप समस्याओं को सुलझाना सीखते हैं।
यह केवल पास होने के लिए नहीं है। यह नौकरी पाने के लिए है। छठी कक्षा से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाती है। आप पढ़ाई के साथ हुनर भी सीखते हैं।
डिजिटल पाठ्यक्रम और ऑनलाइन संसाधन
टेक्नोलॉजी पढ़ाई को आसान बनाती है। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम होते हैं। किताबों में क्यूआर कोड होते हैं। आप उन्हें स्कैन करते हैं। वीडियो और चित्र आपके सामने आते हैं। अगर आप स्कूल नहीं जा पाते तो पढ़ाई नहीं रुकती। ऑनलाइन संसाधन हमेशा उपलब्ध रहते हैं। दीक्षा और स्वयं पोर्टल आपकी मदद करते हैं। आप दुनिया भर की जानकारी घर बैठे पाते हैं।
मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली में सुधार
साल के अंत में 3 घंटे की परीक्षा आपकी काबिलियत नहीं बता सकती। पीएम श्री स्कूल मूल्यांकन का तरीका बदलते हैं।
• आपका आकलन पूरे साल चलता है।
• रटने की क्षमता की जाँच नहीं होती।
• सोचने की क्षमता की जाँच होती है।
• रिपोर्ट कार्ड में केवल नंबर नहीं होते।
• उसमें आपके व्यवहार और कौशल का जिक्र होता है।
इसे होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड कहते हैं। आप अपनी कमियों को जानते हैं। आप उन्हें सुधारते हैं। परीक्षा का डर खत्म हो जाता है।
छात्र जीवन और परिणाम
पीएम श्री स्कूल में सीखने का अनुभव
आपको यहां पारंपरिक कक्षाओं से अलग माहौल मिलता है. आप पुरानी रटने वाली पद्धति से आजाद होते हैं. यहां शिक्षा अनुभवात्मक होती है. आप स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हैं.
शिक्षक आपको केवल लेक्चर नहीं देते. वे आपको चर्चा में शामिल करते हैं. आप ‘जादुई पिटारा’ और खिलौनों के माध्यम से जटिल सिद्धांत समझते हैं. पढ़ाई का बोझ कम होता है. आप खुशी के साथ विद्यालय आते हैं. हर दिन कुछ नया सीखने की जिज्ञासा बनी रहती है.
अध्ययन का असर और छात्र सफलता दर
आपकी प्रगति का आकलन बदल जाता है. यहां नंबर लाने से ज्यादा सीखने पर जोर होता है. परीक्षाएं आपकी याददाश्त नहीं परखतीं. वे आपकी समझ और कौशल की जांच करती हैं.
आप ज्ञान को वास्तविक जीवन में लागू करना सीखते हैं. इससे सफलता दर में सुधार होता है. कमजोर छात्रों को पीछे नहीं छोड़ा जाता. उपचारात्मक कक्षाओं से उन्हें मदद मिलती है. ड्रॉपआउट दर में कमी आती है. आप अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं.
छात्र सहभागिता और कौशल विकास
आप कक्षा में केवल श्रोता नहीं रहते. आप सक्रिय भागीदार बनते हैं. अटल टिंकरिंग लैब में आप नए प्रयोग करते हैं. आपको कोडिंग और रोबोटिक्स जैसे कौशल सिखाए जाते हैं.
आपकी आलोचनात्मक सोच विकसित होती है. आप समस्याओं का समाधान खोजना सीखते हैं. संचार कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाता है. आप दूसरों के साथ मिलकर काम करना सीखते हैं. यह आपको 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करता है.
छात्र आधारित गतिविधियों का महत्व
खेल और कला अतिरिक्त विषय नहीं हैं. ये आपके पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा हैं. आप पेंटिंग और संगीत के जरिए खुद को व्यक्त करते हैं. आधुनिक खेल के मैदान आपकी शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं.
आप जल संरक्षण जैसी हरित पहलों में भाग लेते हैं. आप स्कूल में पौधे लगाते हैं. आप कचरा प्रबंधन सीखते हैं. ये गतिविधियां आपको जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं. सामाजिक मेलजोल बढ़ता है. आप अनुशासन और नेतृत्व के गुण सीखते हैं.
शिक्षा के बाद करियर अवसरों पर प्रभाव
पीएम श्री से निकलने पर आप भीड़ से अलग होते हैं. आपके पास किताबी ज्ञान के साथ तकनीकी कौशल होता है. आप वोकेशनल ट्रेनिंग के कारण रोजगार के लिए तैयार रहते हैं.
कंपनियां हुनरमंद युवाओं को पसंद करती हैं. आपको कंप्यूटर और नई तकनीक की समझ होती है. आप अपना खुद का काम शुरू करने में सक्षम होते हैं. उच्च शिक्षा में आपको लाभ मिलता है. आपका आधार मजबूत होता है. आप भविष्य के बाजार में आसानी से जगह बना लेते हैं.
PM SHRI योजना के लाभ
यह योजना आपके बच्चों की शिक्षा का तरीका पूरी तरह बदल देती है। सरकार ने पुरानी शिक्षण विधियों को हटाकर नई और आधुनिक तकनीक अपनाई है। इसका सीधा असर आपके बच्चे के भविष्य पर पड़ता है। आपको इस योजना से मिलने वाले लाभों को विस्तार से समझना चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक पहुँचाना
पीएम श्री स्कूल रटने की आदत को खत्म करते हैं। आपका बच्चा अब सिर्फ किताबों को याद नहीं करता। वह विषयों को समझता है। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत काम करती है। इसमें किताबों के बोझ को कम किया गया है।
शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। वे बच्चों को खेल और प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाते हैं। कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल मजेदार होता है। आपका बच्चा स्कूल जाने से डरता नहीं है। वह स्कूल जाने के लिए उत्साहित रहता है। यहाँ पढ़ाई का मतलब सिर्फ पास होना नहीं है। इसका मकसद बच्चे को समझदार बनाना है। हर बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलता है।
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में सुधार
अच्छी शिक्षा पाने के लिए आपको अब शहर जाने की जरूरत नहीं है। पीएम श्री योजना ने गाँव के स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बना दिया है। सरकार ने 14,500 से अधिक स्कूलों को अपग्रेड किया है। इसमें से अधिकतर स्कूल ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में हैं।
गाँव के बच्चे भी अब स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं। उनके पास शहर के बच्चों जैसी सुविधाएं हैं। यह योजना अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करती है। आपके पड़ोस का सरकारी स्कूल अब एक मॉडल स्कूल है। दूसरे स्कूल भी इससे प्रेरणा लेते हैं। गाँव के विकास की शुरुआत स्कूल से होती है। यह योजना उस नींव को मजबूत करती है।
समावेशी और सुरक्षित शिक्षा वातावरण
स्कूल में आपका बच्चा सुरक्षित महसूस करता है। लड़कियों के लिए अलग और साफ शौचालय की व्यवस्था है। स्कूल की इमारतें सुरक्षित और पक्की हैं। यहाँ किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव नहीं होता।
• दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप और विशेष सुविधाएं मौजूद हैं।
• स्कूल का माहौल अनुशासन और प्यार से भरा होता है।
• शिक्षकों का व्यवहार सहयोगपूर्ण होता है।
• खेल के मैदान सुरक्षित और बड़े होते हैं।
माता-पिता के रूप में आपकी चिंता खत्म हो जाती है। स्कूल के अंदर का माहौल घर जैसा होता है। हर बच्चे को सम्मान मिलता है। उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि या जाति का कोई फर्क नहीं पड़ता। सभी बच्चे एक साथ बैठकर खाना खाते हैं और पढ़ते हैं।
छात्र-निपुणता, भाषा दक्षता और कंप्यूटर शिक्षा
आज के दौर में सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी जानना काफी नहीं है। पीएम श्री स्कूल में बहुभाषी शिक्षा पर जोर दिया जाता है। आपका बच्चा अपनी मातृभाषा में भी पढ़ाई कर सकता है। इससे उसे चीजें जल्दी समझ आती हैं।
कक्षा 6 से ही कोडिंग और कंप्यूटर सिखाया जाता है। बाज़ार में नौकरी पाने के लिए कंप्यूटर का ज्ञान जरूरी है। यह योजना आपके बच्चे को भविष्य के लिए तैयार करती है। उसे रटा-रटाया ज्ञान नहीं मिलता। उसे वह हुनर मिलता है जो काम आता है।
• वैज्ञानिक सोच विकसित की जाती है।
• गणित और विज्ञान को आसान तरीके से समझाया जाता है।
• संवाद कला पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
• बच्चा अपनी बात निडर होकर कह सकता है।
जबरदस्त डिजिटल और तकनीकी संपर्क
किताबों से धूल झाड़ने का समय चला गया है। पीएम श्री स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी है। इंटरनेट की सुविधा हर क्लासरूम में है। शिक्षक स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल करते हैं। इससे मुश्किल कॉन्सेप्ट भी आसान लगते हैं।
वीडियो और एनिमेशन के जरिए पढ़ाई होती है। आपका बच्चा दुनिया भर की जानकारी एक क्लिक पर पाता है। विज्ञान की प्रयोगशालाएं आधुनिक मशीनों से लैस हैं। यहाँ पुराना सामान नहीं मिलता। सब कुछ नया और हाई-टेक है।
सरकार ने स्कूलों को डिजिटल रूप से जोड़ा है। आप घर बैठे अपने बच्चे की प्रगति देख सकते हैं। हाजिरी से लेकर रिजल्ट तक सब ऑनलाइन है। यह पारदर्शिता आपके भरोसे को बढ़ाती है। तकनीक ने शिक्षा को आपकी मुट्ठी में कर दिया है।
चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
पीएम श्री योजना का लक्ष्य बड़ा है। सरकार 14500 स्कूलों को बदलना चाहती है। कागजों पर यह योजना शानदार दिखती है। जमीनी हकीकत में कई बाधाएं हैं। आपको इन चुनौतियों को समझना होगा। ये बाधाएं तय करेंगी कि योजना सफल होगी या नहीं।
संसाधनों का सही वितरण
सरकार ने 27360 करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह एक बड़ी राशि है। पैसा होना काफी नहीं है। पैसे का सही जगह पहुँचना जरूरी है। सरकारी सिस्टम में अक्सर लीकेज होती है। पैसा ऊपर से चलता है लेकिन स्कूल तक पूरा नहीं पहुँचता। आप देखते हैं कि फंड जिला स्तर पर अटक जाता है। स्कूलों को लैब और लाइब्रेरी के लिए समय पर पैसा मिलना चाहिए। अगर कंप्यूटर आ गए और बिजली का बजट नहीं मिला तो सब बेकार है। आपको सुनिश्चित करना होगा कि भ्रष्टाचार इस पैसे को न खा जाए। सीधा पैसा स्कूल प्रबंधन समिति के पास जाना चाहिए।
शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता
आप स्कूल में सबसे महंगा स्मार्ट बोर्ड लगा सकते हैं। आप दीवारों पर रंग-रोगन कर सकते हैं। अगर शिक्षक को पढ़ाना नहीं आता तो सब व्यर्थ है। नई शिक्षा नीति रट्टा मारने के खिलाफ है। यह गतिविधि आधारित पढ़ाई की बात करती है। पुराने शिक्षक इस बदलाव से डरते हैं। उन्हें लगता है कि तकनीक उनका काम बढ़ाएगी। कई शिक्षकों को कंप्यूटर चलाना नहीं आता। सरकार को सिर्फ मशीनें नहीं खरीदनी चाहिए। उन्हें शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भारी निवेश करना होगा। बिना ट्रेनिंग के “जादुई पिटारा” सिर्फ एक खिलौना बनकर रह जाएगा। आपको शिक्षकों का माइंडसेट बदलना होगा।
कुछ राज्यों की असहमति के मुद्दे
राजनीति अक्सर विकास के रास्ते में आती है। शिक्षा को राजनीति से दूर रखना चाहिए। पंजाब, दिल्ली और पश्चिम बंगाल ने शुरू में इस योजना का विरोध किया। उन्होंने केंद्र के साथ एमओयू साइन नहीं किया। केंद्र सरकार ने जवाब में उनका समग्र शिक्षा अभियान (SSA) फंड रोक दिया। इसका नुकसान किसको हुआ। इसका नुकसान गरीब बच्चों को हुआ। फंड रुकने से स्कूलों में काम रुक गया। अब दिल्ली ने साइन कर लिया है। यह देरी नहीं होनी चाहिए थी। जब राज्य और केंद्र लड़ते हैं तो जनता पिसी जाती है। योजना की सफलता के लिए सबका साथ आना जरूरी है।
कार्यान्वयन में देरी और निगरानी
यह योजना 2026-27 तक पूरी होनी है। समय बहुत कम बचा है। स्कूलों का चयन “चैलेंज मोड” के जरिए हुआ। इस प्रक्रिया में काफी समय लग गया। अभी भी कई स्कूलों में काम शुरू नहीं हुआ है। सरकारी काम की रफ्तार धीमी होती है। निगरानी करना सबसे बड़ा काम है। अधिकारियों को एसी कमरों से बाहर निकलना होगा। उन्हें स्कूलों का दौरा करना होगा। सिर्फ कागजी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता। SQAF फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करना होगा। अगर आप ढिलाई बरतेंगे तो स्कूल नहीं सुधरेंगे।
यूपी, बिहार और राजस्थान में ग्राम-स्तर चुनौतियाँ
इन राज्यों के गाँवों में हालात शहर से अलग हैं। यहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बिजली का आना-जाना लगा रहता है। इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी है। आप बिना इंटरनेट के स्मार्ट क्लास कैसे चलाएंगे। यहाँ शिक्षकों की भारी कमी है। एक शिक्षक पर सौ से ज्यादा बच्चे हैं। खेती के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं आते। इन राज्यों में योजना को लागू करना आसान नहीं है। दिल्ली का मॉडल बिहार के गाँव में काम नहीं करेगा। आपको यहाँ के लिए अलग रणनीति बनानी होगी। पहले बिजली और इंटरनेट ठीक करना होगा। उसके बाद ही हाई-टेक शिक्षा की बात हो सकती है।
PM SHRI के प्रभाव और बदलाव
आप अपने आसपास के सरकारी स्कूलों में बदलाव महसूस करेंगे। ये बदलाव केवल इमारतों के रंग-रोगन तक सीमित नहीं हैं। यह शिक्षा की गुणवत्ता को बदल रहा है।
स्कूलों में नामांकन में वृद्धि
माता-पिता अब सरकारी स्कूलों की ओर वापस लौट रहे हैं। निजी स्कूलों की भारी फीस से बचने के लिए यह एक बेहतर विकल्प है। PM SHRI स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं। स्मार्ट क्लासरूम और साफ-सुथरे परिसर छात्रों को आकर्षित करते हैं। आप देखेंगे कि इन स्कूलों में उपस्थिति दर सुधरी है। बच्चे स्कूल आने के लिए उत्साहित रहते हैं। यह योजना सरकारी शिक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल कर रही है।
शिक्षा परिणामों में सकारात्मक बदलाव
रटने की पद्धति अब पुरानी हो चुकी है। PM SHRI स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का पालन करते हैं। यहां बच्चे प्रयोग करके सीखते हैं। विज्ञान की प्रयोगशालाएं केवल दिखावे के लिए नहीं हैं। छात्र वहां जाकर खुद प्रयोग करते हैं। शिक्षक अब मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। परीक्षाओं के परिणाम बेहतर हो रहे हैं। बच्चों में आलोचनात्मक सोच विकसित हो रही है। आप अपने बच्चे में आत्मविश्वास की बढ़ोतरी देखेंगे।
स्थानीय समुदायों पर असर
स्कूल केवल छात्रों के लिए नहीं होता। यह पूरे समुदाय का केंद्र बनता है। PM SHRI योजना में स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को भी जोड़ा जाता है। स्थानीय संस्कृति और कौशल को पाठ्यक्रम में जगह मिलती है। इससे रोजगार के अवसर भी बनते हैं। गांव के लोग स्कूल के विकास में भागीदारी निभाते हैं। यह सामुदायिक गर्व का विषय बन जाता है।
डिजिटल विभाजन को पाटने की पहल
शहर और गांव के बीच की तकनीकी खाई कम हो रही है। गांव के बच्चे भी अब टैबलेट और कंप्यूटर का उपयोग करते हैं। इंटरनेट की सुविधा हर PM SHRI स्कूल में अनिवार्य है। डिजिटल लाइब्रेरी से बच्चों को दुनिया भर की किताबें मिलती हैं। आपके गांव का स्कूल अब वैश्विक स्तर की जानकारी से जुड़ा है। यह तकनीक बच्चों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करती है।
राज्यों के सफल उदाहरण
कई राज्यों ने इस योजना को बहुत तेजी से अपनाया है। उन्होंने पुरानी इमारतों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों में बदल दिया है। आप गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसके परिणाम देख सकते हैं। वहां के मॉडल स्कूल दूसरों के लिए मिसाल बन गए हैं। इन स्कूलों ने साबित किया है कि सरकारी शिक्षा भी उच्च गुणवत्ता वाली हो सकती है।
राज्यों में कार्यान्वयन
हर राज्य की अपनी चुनौतियां और अपनी गति है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच तालमेल यहां महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश में PM SHRI कार्यान्वयन
उत्तर प्रदेश ने इस योजना को मिशन मोड में लागू किया है। बड़ी संख्या में स्कूलों का चयन हुआ है। राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया है। आप देखेंगे कि पुराने जर्जर स्कूल अब नई चमक के साथ खड़े हैं। वहां शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को मिल रहा है। नामांकन संख्या में भारी उछाल आया है।
बिहार और बंगाल में स्थिति
यहां स्थिति थोड़ी अलग रही है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने शुरुआत में इस योजना में रुचि नहीं दिखाई थी। इसके कारण केंद्र से मिलने वाला समग्र शिक्षा अभियान का फंड रुक गया था। यह राजनीतिक खींचतान का विषय बना। इसका नुकसान छात्रों को उठाना पड़ा। फंड रुकने से विकास कार्य प्रभावित हुए। अब धीरे-धीरे समझ बन रही है कि छात्रों का हित सर्वोपरि है। राजनीति को शिक्षा से दूर रखना आवश्यक है।
केरल में सकारात्मक प्रतिक्रिया
केरल ने अपने पहले से मजबूत शिक्षा मॉडल में इसे जोड़ा है। उन्होंने इस योजना के तहत मिलने वाले फंड का बेहतरीन उपयोग किया है। वहां डिजिटल कक्षाओं पर जोर दिया गया है। केरल के शिक्षक नई शिक्षण तकनीकों को अपना रहे हैं। राज्य ने इसे अपनी मौजूदा योजनाओं के साथ एकीकृत किया है। आपको वहां के स्कूलों में एक सुचारू व्यवस्था दिखेगी।
अन्य राज्यों की भूमिका
पंजाब और दिल्ली ने भी शुरुआत में आनाकानी की थी। बाद में उन्होंने छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया। यह एक बड़ी जीत है। इससे वहां के स्कूलों को रुका हुआ फंड मिलेगा। पूर्वोत्तर के राज्यों को 90:10 के अनुपात में फंड मिल रहा है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है।
सफल मॉडल स्कूल के राज्य-उदाहरण
हर राज्य अब अपने सर्वश्रेष्ठ स्कूल को प्रदर्शित करना चाहता है। आप मध्य प्रदेश के “सीएम राइज” स्कूलों की तर्ज पर बदलाव देखेंगे। राजस्थान में भी स्कूलों को हाई-टेक बनाया जा रहा है। ये मॉडल स्कूल आसपास के अन्य स्कूलों को प्रेरित करते हैं। वहां के प्रधानाचार्य और शिक्षक अन्य स्कूलों के लिए मेंटर का काम करते हैं। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है। एक स्कूल सुधरता है और पूरा जिला उससे सीखता है।
प्राइमरी, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर
पीएम श्री योजना स्कूलों को सिर्फ रंग-रोगन नहीं देती। यह पढ़ाई के तरीके को बदलती है। आप यहाँ समझेंगे कि हर स्तर के छात्र पर इसका क्या असर होता है।
प्राथमिक छात्रों को मिलने वाले लाभ
छोटे बच्चों के लिए स्कूल अब बोझ नहीं है। पीएम श्री स्कूलों में ‘जादुई पिटारा’ और ‘बाला’ (BALA – बिल्डिंग एज लर्निंग एड) का उपयोग होता है। इसका मतलब है कि स्कूल की दीवारों और कमरों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। आपके बच्चे रट्टा नहीं मारेंगे। वे खिलौनों और दीवारों पर बने चित्रों से सीखेंगे। सरकार ने इन स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित और आनंदमय माहौल सुनिश्चित किया है। यहाँ बच्चों को प्री-स्कूल से ही एक मजबूत नींव मिलती है।
माध्यमिक स्तर पर सुधार
कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए पढ़ाई का तरीका बदल जाता है। यहाँ सिर्फ किताबें नहीं चलतीं। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब अनिवार्य हैं। छात्रों को रटने की जगह समझने पर जोर दिया जाता है। विज्ञान और गणित जैसे विषयों को प्रयोग करके सिखाया जाता है। आप देखेंगे कि छात्रों में जिज्ञासा बढ़ रही है। वे सवाल पूछते हैं और खुद जवाब ढूंढते हैं। यहाँ कौशल विकास यानी स्किल डेवलपमेंट की शुरुआत हो जाती है।
उच्च माध्यमिक शिक्षा का पीएम श्री प्रभाव
कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए यह समय करियर चुनने का है। पीएम श्री स्कूल यहाँ सबसे बड़ा बदलाव लाते हैं। पुरानी रटंत विद्या खत्म हो चुकी है। अब छात्रों को वोकेशनल ट्रेनिंग यानी व्यावसायिक शिक्षा मिलती है। स्कूल में ही अलग-अलग ट्रेड और हुनर सिखाए जाते हैं। अगर छात्र विज्ञान के साथ संगीत पढ़ना चाहे तो वह पढ़ सकता है। विषयों के बीच की दीवारें हटा दी गई हैं। यहाँ पूरी तरह सुसज्जित साइंस लैब और अटल टिंकरिंग लैब मिलती हैं। छात्र यहाँ नई तकनीक और इनोवेशन पर काम करते हैं।
छात्र-विशेष कार्यक्रम और क्रियाएँ
हर छात्र खास है। पीएम श्री स्कूल इस बात को मानते हैं। यहाँ कमजोर छात्रों के लिए अलग से रेमेडियल क्लास लगती हैं। तेज छात्रों को आगे बढ़ने के लिए मेंटरशिप मिलती है। खेलकूद के लिए बड़े मैदान और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। स्कूल में नियमित हेल्थ चेकअप होते हैं। छात्रों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग की सुविधा भी मिलती है। यहाँ का लक्ष्य सिर्फ पास होना नहीं है। लक्ष्य एक अच्छा इंसान और काबिल नागरिक बनाना है।
पीएम श्री और अन्य योजनाओं से तुलना
बाजार में कई सरकारी योजनाएँ हैं। आपको यह समझना होगा कि पीएम श्री उन सबसे अलग कैसे है।
पीएम श्री बनाम समग्र शिक्षा
समग्र शिक्षा अभियान एक बड़ा छाता है। यह देश के सभी सरकारी स्कूलों को बेसिक मदद देता है। पीएम श्री इससे एक कदम आगे है। यह एलीट और आदर्श स्कूल बनाने की योजना है। समग्र शिक्षा में सामान्य सुधार होते हैं। पीएम श्री में स्कूल को ‘मॉडल स्कूल’ बनाया जाता है। दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में पहले समग्र शिक्षा का फंड रोका गया था। अब पीएम श्री को अपनाने के बाद वहाँ भी यह विशिष्ट सुविधाएँ मिलेंगी। समग्र शिक्षा आधार है तो पीएम श्री उसका अपग्रेडेड वर्जन है।
पीएम श्री बनाम अन्य केंद्र-स्कूल योजनाएँ
केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय पहले से ही अच्छे माने जाते हैं। पीएम श्री इन स्कूलों को भी अपग्रेड करता है। यह योजना सिर्फ नए स्कूल नहीं खोलती। यह पुराने और अच्छे स्कूलों को चुनती है और उन्हें विश्व स्तर का बनाती है। अन्य योजनाओं में अक्सर सिर्फ बिल्डिंग पर ध्यान दिया जाता है। पीएम श्री में पढ़ाई के तरीके और टेक्नोलॉजी पर 18128 करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट खर्च हो रहा है। यह इसे बाकी योजनाओं से ज्यादा असरदार बनाता है।
पीएम श्री और एनईपी 2020 की तालमेल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 एक दस्तावेज है। पीएम श्री उस दस्तावेज का जीता-जागता सबूत है। एनईपी 2020 में 5+3+3+4 सिस्टम की बात कही गई है। पीएम श्री स्कूल इसी सिस्टम पर चलते हैं। यहाँ स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर है। एनईपी जो वादे करती है पीएम श्री स्कूल उन्हें पूरा करते हैं। यह नीति और अमल का सही मेल है।
क्या पीएम श्री अन्य शिक्षा पहलों से बेहतर है?
जवाब हाँ है। कारण साफ है। पीएम श्री में चयन प्रक्रिया बहुत सख्त है। ‘चैलेंज मोड’ के जरिए सिर्फ काबिल स्कूलों को चुना गया है। यह प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता सुनिश्चित करती है। यहाँ पैसा सही जगह लग रहा है। स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब और प्रशिक्षित शिक्षक इसे बेहतर बनाते हैं। यह योजना 2026-27 तक चलेगी। इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में आप सरकारी शिक्षा में एक बड़ा बदलाव देखेंगे। यह बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि आपके पड़ोस के स्कूल में दिखेगा।
भविष्य का मार्ग
2027 के बाद PM SHRI की ज़िम्मेदारी राज्य को
PM SHRI योजना की समय सीमा तय है। यह परियोजना सत्र 2026-27 तक चलेगी। इसके बाद एक बड़ा बदलाव आएगा। केंद्र सरकार अपनी वित्तीय मदद बंद कर देगी। स्कूलों को चलाने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों पर आ जाएगी। आपको यह समझना होगा कि फंडिंग का 60:40 अनुपात खत्म हो जाएगा। राज्य सरकारों को अपने बजट से इन स्कूलों का स्तर बनाए रखना होगा। स्कूलों द्वारा हासिल किए गए बेंचमार्क को नीचे नहीं गिरने देना राज्यों का काम होगा। आप अपने स्थानीय प्रशासन से जवाबदेही की मांग करें। स्कूलों की गुणवत्ता बनाए रखना अब आपकी राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी होगी।
दीर्घकालिक प्रभाव और स्केल-अप योजनाएँ
सरकार इन 14500 स्कूलों तक नहीं रुकेगी। यह एक प्रयोग है। इसका उद्देश्य एक सफल मॉडल तैयार करना है। आपके पड़ोस के सामान्य सरकारी स्कूल PM SHRI स्कूलों से सीखेंगे। वे इन आदर्श स्कूलों की शिक्षण विधियों को अपनाएंगे। इसे मेंटरशिप मॉडल कहते हैं। एक PM SHRI स्कूल अपने आसपास के कई स्कूलों को लीड करेगा। आप अपने जिले में शिक्षा के स्तर में सुधार देखेंगे। अच्छी तकनीक और सुविधाएं धीरे-धीरे सभी स्कूलों तक पहुंचेंगी। यह योजना पूरे शिक्षा तंत्र को बदलने का खाका तैयार करती है।
शिक्षा में नवीन नवाचार के अवसर
पुराने तरीके अब काम नहीं करेंगे। PM SHRI स्कूल नई सोच लाते हैं। बच्चे किताबों से ज्यादा प्रयोगों से सीखते हैं। स्कूलों में खिलौनों पर आधारित शिक्षण शुरू हुआ है। इसे जादुई पिटारा कहते हैं। सौर ऊर्जा और जल संरक्षण जैसे विषयों को स्कूल के ढांचे में शामिल किया गया है। बच्चे दीवारों और फर्श को देखकर सीखते हैं। इसे बाला या बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड कहते हैं। आप पाएंगे कि स्कूल की इमारत खुद एक शिक्षक बन गई है। कौशल विकास पर जोर दिया जाता है। बच्चे स्कूल से निकलकर सीधे रोजगार के लिए तैयार होते हैं।
PM SHRI का भारत में शिक्षा की तस्वीर पर व्यापक असर
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को जमीन पर उतारती है। रटने की पुरानी आदत खत्म हो रही है। समझकर सीखने पर जोर है। 20 लाख से ज्यादा छात्र सीधे लाभान्वित होंगे। यह संख्या बढ़ती जाएगी। गरीब और पिछड़े इलाकों के बच्चों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिल रही हैं। स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब अब केवल निजी स्कूलों की जागीर नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में भी यह बदलाव आ रहा है। आप एक समावेशी भारत का निर्माण होते देखेंगे। हर बच्चे को समान अवसर मिलेगा।
अक्सर पूछे गए प्रश्न (FAQ)
PM SHRI योजना किसके लिए है?
यह योजना भारत के सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए है। यह उन बच्चों के लिए है जो केंद्र, राज्य या स्थानीय निकायों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में पढ़ते हैं। इसका लाभ उन छात्रों को मिलता है जिनके स्कूल चयन प्रक्रिया पास करते हैं। यह योजना सीधे तौर पर आपकी और आपके बच्चों की है।
कितने स्कूल PM SHRI में शामिल हैं?
सरकार ने 14500 से अधिक स्कूलों का लक्ष्य रखा है। अभी तक अलग-अलग चरणों में 12079 स्कूलों का चयन हो चुका है। इनमें प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। यह संख्या भविष्य में बढ़ सकती है।
PM SHRI योजना 2026 में कितने लाभार्थी हैं?
अनुमान है कि 20 लाख से अधिक छात्र इससे सीधा लाभ उठाएंगे। यह संख्या 2026-27 के सत्र तक और बढ़ सकती है। इसमें केवल छात्र ही नहीं बल्कि शिक्षक और अभिभावक भी शामिल हैं। पूरा समुदाय इसका लाभ उठाता है।
शिक्षक-छात्र अनुपात बदलता है क्या?
हाँ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षक और छात्र का अनुपात सुधारा जाएगा। हर बच्चे पर शिक्षक का ध्यान होना जरूरी है। छोटे बच्चों के लिए यह अनुपात और भी कम रखा जाता है। आपको कक्षाओं में भीड़ कम और पढ़ाई ज्यादा दिखेगी।
योजना में अपने स्कूल को कैसे नामांकित करें?
आप सीधे आवेदन नहीं कर सकते। स्कूलों का चयन चैलेंज मोड के जरिए होता है। स्कूल को पहले पोर्टल पर अपना डेटा अपडेट करना होता है। इसके बाद तीन चरणों की कड़ी प्रक्रिया होती है। राज्य सरकार स्कूलों की सिफारिश करती है। अंतिम फैसला केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति लेती है। स्कूल को अपने प्रदर्शन से खुद को साबित करना होता है।
निष्कर्ष
पीएम श्री स्कूल योजना का समग्र मूल्यांकन
पीएम श्री योजना 14500 से अधिक सरकारी स्कूलों को पूरी तरह बदल रही है। सरकार ने इसके लिए 27360 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह योजना केवल इमारतों की मरम्मत नहीं है। यह पढ़ाई के तरीके में बुनियादी बदलाव है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का व्यावहारिक रूप है। केंद्र और राज्यों के बीच शुरुआती मतभेद अब खत्म हो चुके हैं। दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों का इस योजना में शामिल होना छात्रों की जीत है। राजनीति पीछे छूट गई है और छात्रों का भविष्य अब प्राथमिकता है। चयन प्रक्रिया पारदर्शी और चुनौतीपूर्ण रही है। केवल वही स्कूल चुने गए हैं जो बदलाव के लिए तैयार थे।
देश की शिक्षा व्यवस्था में महत्व
ये 14500 स्कूल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेंगे। आपके पड़ोस के अन्य स्कूल इनसे सीखेंगे और अपनी गुणवत्ता सुधारेंगे। यह रट्टा मारने वाली पढ़ाई को खत्म करता है। अब पढ़ाई खिलौनों और प्रयोगों के माध्यम से होगी। 20 लाख से अधिक छात्र इसका सीधा लाभ उठाएंगे। यह स्कूल आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्यों का मिश्रण हैं। यहाँ स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब उपलब्ध हैं। यह स्कूल पर्यावरण के प्रति भी जागरूक हैं। जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी चीजें यहाँ सिखाई जाती हैं। यह योजना दिखाती है कि सरकारी स्कूल भी विश्व स्तर के हो सकते हैं।
छात्रों अभिभावकों और समुदायों के लिए सलाह
आपको अब जागरूक होना होगा। अपने क्षेत्र में चयनित पीएम श्री स्कूल की पहचान करें। अभिभावक होने के नाते आपको स्कूल प्रशासन से सवाल पूछने चाहिए। देखें कि क्या स्मार्ट क्लास और लैब का सही उपयोग हो रहा है। छात्रों को इन नई सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना चाहिए। केवल किताबों तक सीमित न रहें। अटल टिंकरिंग लैब में जाकर नए प्रयोग करें। समुदाय को इन स्कूलों की देखरेख में मदद करनी चाहिए। यह सरकारी संपत्ति नहीं बल्कि आपके बच्चों का भविष्य है। शिक्षकों के साथ मिलकर काम करें। 2026 तक इन सुधारों को स्थायी बनाना आपकी जिम्मेदारी है।




