PM Vishwakarma Yojana 2025 (पीएम विश्वकर्मा योजना 2025) – Online Application Form / Registration, Login

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देखो, अगर तुम प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को लेकर साफ‑साफ और सरल तरीके से समझना चाहते हो, तो मैं तुम्हें एकदम दोस्त की तरह समझा देता हूँ कि यह योजना है क्या और अब तक इसका असर कैसा रहा है।

विश्वकर्मा योजना को सरकार ने 17 सितंबर 2023 को शुरू किया था।
योजना का मकसद सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं है, बल्कि देश भर के कारीगरों और शिल्पकारों को उनके पारंपरिक काम में नई ताकत, नए अवसर और आधुनिक सुविधा देना है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रही —
इसका असली फायदा ज़मीन तक पहुँचा है
इसी वजह से 19 अक्टूबर 2024 तक, देश के अलग‑अलग हिस्सों में रहने वाले 23 लाख से भी ज़्यादा कारीगरों को इस योजना से लाभ मिल चुका है।

सरकार इस योजना के तहत कारीगरों को कई तरह की सहायता देती है:

  • बहुत कम ब्याज दर पर लोन
  • नई तकनीक और आधुनिक तरीकों की ट्रेनिंग
  • औज़ारों के लिए आर्थिक सहायता
  • डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा
  • मर्केटिंग और बिक्री में मदद

यानी सीधे शब्दों में —
यह योजना कारीगरों को सिर्फ पैसे नहीं देती, बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाती है कि वे अपने काम को बड़े स्तर पर ले जा सकें और अच्छी कमाई कर सकें।

विश्वकर्मा योजना को सरकार ने सामाजिक कल्याण कार्यक्रम के रूप में बनाया है, और यह अब तक बहुत प्रभावी साबित हुई है।
अगर आप भी किसी पारंपरिक काम से जुड़े हैं, तो इस योजना को समझना और इसके लाभ समय पर लेना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

PM Vishwakarma Yojana विश्वकर्मा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की घोषणा 1 फरवरी 2023 को की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि देश के पारंपरिक विश्वकर्मा समुदाय—यानी वे कारीगर जो पीढ़ियों से अपने हाथों के हुनर से काम करते आ रहे हैं—उन्हें आर्थिक सहायता, आधुनिक कौशल प्रशिक्षण और अपने काम को आगे बढ़ाने का मौका मिले।

सरकार इस योजना के तहत कारीगरों को कई तरह की मदद देती है, जैसे:

  • काम में सुधार के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण
  • प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन ₹500 का मानदेय
  • काम में आने वाले औज़ार खरीदने के लिए ₹15,000 की सहायता
  • और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए कुल ₹3,00,000 तक का रियायती लोन, जिसकी ब्याज दर सिर्फ 5% रखी गई है।

यह लोन एक बार में नहीं दिया जाता, बल्कि दो चरणों में बाँटा गया है:

  1. पहला चरण: ₹1,00,000 तक का लोन
  2. दूसरा चरण: पहले लोन की समय पर अदायगी के बाद अतिरिक्त ₹2,00,000

इससे कारीगर बिना ज्यादा दबाव के धीरे‑धीरे अपना काम बढ़ा सकते हैं।

कारीगरों के लिए यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

देश में ऐसे लाखों कारीगर हैं जिनके पास अच्छा हुनर तो है, लेकिन:

  • बैंक से लोन लेने में दिक्कत होती है,
  • आधुनिक औज़ार खरीदने के पैसे नहीं होते,
  • नई तकनीक सीखने का मौका नहीं मिल पाता,
  • और बाजार में अपनी पहचान बनाना मुश्किल हो जाता है।

पीएम विश्वकर्मा योजना इन सभी समस्याओं को सीधे तौर पर हल करने की कोशिश करती है।
यह पहल सुनिश्चित करती है कि पारंपरिक कला‑कौशल को सिर्फ बचाया ही नहीं जाए, बल्कि आगे बढ़ाया भी जाए।

किन कारीगरों को मिलेगा लाभ?

यह योजना कई पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को लक्षित करती है, जैसे:

  • बढ़ईगीरी
  • बुनाई
  • कुम्हारी (मिट्टी के बर्तन)
  • लोहार का काम
  • जूता बनाने का काम
  • मूर्ति और पत्थर तराशने का काम
  • और ऐसे ही कई अन्य पारंपरिक हुनर

सरकार का उद्देश्य है कि ये कारीगर सिर्फ अपने काम को जारी ही न रखें, बल्कि नई तकनीक, वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरणों की मदद से अपनी आजीविका को पहले से बेहतर बना सकें।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – इसके प्रमुख लाभ आसान भाषा में

देखो, अगर तुम्हें यह समझना है कि पीएम विश्वकर्मा योजना असल में कारीगरों के लिए क्या‑क्या फायदे लाती है, तो मैं इसे बिल्कुल सरल और दोस्ताना अंदाज़ में समझा देता हूँ।
यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है—यह कारीगरों की पूरी जिंदगी में सुधार लाने की कोशिश करती है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने काम को बड़े स्तर पर ले जा सकें।

1. कौशल विकास प्रशिक्षण – ताकि कारीगर समय के साथ आगे बढ़ सके

आज के समय में बाजार काफी बदल चुका है।
अगर कारीगर पुराने तरीके से ही काम करते रहेंगे, तो वे दूसरों के मुकाबले पीछे रह सकते हैं।

इसी बात को समझते हुए सरकार ने इस योजना में पूरी तरह निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण जोड़ा है।
इस प्रशिक्षण में कारीगरों को सिखाया जाता है—

  • आधुनिक औज़ारों का इस्तेमाल
  • ज्यादा तेजी और सफाई से काम करना
  • नए तकनीकी तरीके
  • और बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद बनाना

यानी यह ट्रेनिंग कारीगर को आज के प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए तैयार करती है, ताकि उनका काम ज्यादा बिके और उनकी कमाई भी बढ़े।

2. ₹500 का दैनिक भत्ता – सीखते समय भी कमाई जारी रहती है

अब सोचो, अगर कोई कारीगर ट्रेनिंग लेने जाता है, तो उस दौरान वह अपने रोज़ के काम से कमाई नहीं कर पाएगा।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन ₹500 का भत्ता देने का फैसला किया है।

इसका फायदा यह है कि—

  • कारीगर बिना आर्थिक तनाव के ट्रेनिंग कर सकता है
  • परिवार की जरूरतें भी चलती रहेंगी
  • सीखने के दौरान कमाई रुकने की चिंता नहीं रहती

सरल भाषा में:
सरकार चाहती है कि कारीगर सीखते हुए भी परेशान न हों।

विश्वकर्मा योजना के अन्य प्रमुख लाभ – आसान भाषा में समझिए

अब मैं आपको इस योजना के बाकी फायदे उतने ही सरल तरीक़े से समझाता हूँ, ताकि आप साफ‑साफ जान सकें कि कारीगरों को इसमें क्या‑क्या मदद मिलती है और यह योजना इतनी खास क्यों है।

1. टूलकिट और उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 की मदद

किसी भी कारीगर का काम तभी आगे बढ़ता है जब उसके पास सही औज़ार हों।
कई बार पुराने औज़ार काम धीमा कर देते हैं या अच्छी गुणवत्ता नहीं आने देते।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार कारीगरों को ₹15,000 की वित्तीय सहायता देती है, ताकि वे:

  • नए और आधुनिक औज़ार खरीद सकें
  • अपने पुराने उपकरण अपडेट कर सकें
  • काम को तेज़, साफ और बेहतर बना सकें

यह रकम सीधे DBT (Direct Bank Transfer) से कारीगर के बैंक खाते में भेजी जाती है, ताकि पैसा बीच में कहीं अटक न जाए।

2. कम ब्याज पर ₹3,00,000 तक का लोन – दो चरणों में

अब सबसे बड़े लाभ की बात करते हैं—रियायती ब्याज पर आसान लोन

सरकार कारीगरों को महज़ 5% ब्याज दर पर कुल ₹3,00,000 तक का लोन देती है।
और यह लोन दो हिस्सों में दिया जाता है:

  • पहला चरण: ₹1,00,000
  • दूसरा चरण: ₹2,00,000 (पहला लोन समय पर चुकाने के बाद)

इससे कारीगर धीरे‑धीरे अपना काम बढ़ा सकते हैं—
जैसे छोटी दुकान खोलना, मशीन खरीदना, स्टॉक बढ़ाना या बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री खरीदना।

कम ब्याज दर होने की वजह से यह लोन चुकाना भी आसान हो जाता है।

3. प्रमाणपत्र और पहचान पत्र – आपकी कारीगरी की आधिकारिक पहचान

योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि लाभार्थियों को सरकार की तरफ से:

  • PM Vishwakarma Certificate
  • PM Vishwakarma ID Card

दोनों मिलते हैं।

इनसे कारीगरों को कई फायदे मिलते हैं—

  • उनके हुनर को एक आधिकारिक पहचान मिलती है
  • सरकारी योजनाओं और बैंक सुविधाओं तक पहुँच आसान हो जाती है
  • कामकाज में विश्वसनीयता बढ़ती है
  • ग्राहक और संस्थान उन्हें एक मान्यता प्राप्त कारीगर के रूप में देखते हैं

सरल भाषा में: यह पहचान पत्र कारीगर के लिए एक “ऑथेंटिक पहचान” बन जाता है।

4. वित्तीय समावेशन – बैंकिंग सिस्टम से जुड़ने का मौका

बहुत से कारीगर आज भी बैंकिंग सिस्टम से दूर हैं।
कई को लोन, बीमा, या एमएसएमई से जुड़ी सुविधाएँ नहीं मिल पातीं।

विश्वकर्मा योजना उन्हें सीधे जोड़ती है:

  • बैंकों से
  • एमएसएमई मंत्रालय से
  • मार्केट से
  • डिजिटल भुगतान प्रणाली से

इससे कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत होने और बड़े बाजारों में कदम रखने का अवसर मिलता है।

5. पारंपरिक कौशल और विरासत का संरक्षण

हमारे देश में कारीगरी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं है—
यह पीढ़ियों से चली आती एक विरासत है।

लकड़ी का काम, कुम्हारी, लोहारगीरी, मूर्तिकला, बुनाई…
इन सभी कौशलों में एक पारंपरिक कला और पहचान छिपी है।

विश्वकर्मा योजना इन कारीगरियों को:

  • आर्थिक सहायता देकर
  • ट्रेनिंग देकर
  • बाजार और तकनीक से जोड़कर

यह सुनिश्चित करती है कि ये हुनर खत्म न हों और आने वाली पीढ़ियाँ भी इन्हें सीख सकें।

सरल शब्दों में:
यह योजना कारीगरी को सिर्फ बचाती नहीं, बल्कि उसे फिर से मजबूत बनाती है।

पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र – आसान भाषा में समझिए

देखो, विश्वकर्मा योजना में सरकार सिर्फ आर्थिक मदद या ट्रेनिंग ही नहीं देती, बल्कि कारीगरों को उनकी कारीगरी की एक आधिकारिक पहचान भी देती है।
यह पहचान दो चीज़ों के रूप में मिलती है:

  • PM Vishwakarma Certificate (प्रमाण पत्र)
  • PM Vishwakarma ID Card (पहचान पत्र)

ये दोनों दस्तावेज़ बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यही यह साबित करते हैं कि व्यक्ति असल में पारंपरिक कारीगरी से जुड़ा है और योजना के सभी लाभों का हकदार है।

1. प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड पर यूनिक डिजिटल नंबर

सरकार हर लाभार्थी को एक अद्वितीय डिजिटल नंबर देती है, जो प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड—दोनों पर दर्ज होता है।
इसका फायदा यह है कि:

  • कारीगर की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहती है
  • रिकॉर्ड रखना आसान हो जाता है
  • किसी भी सरकारी लाभ के लिए उसकी पहचान तुरंत सत्यापित की जा सकती है

सरल भाषा में कहें तो, यह नंबर कारीगर के लिए एक तरह का डिजिटल पहचान चिन्ह है।

2. योजना के सभी लाभ पाने के लिए यह पहचान जरूरी है

जब किसी कारीगर को यह प्रमाण पत्र मिलता है, तो सरकार आधिकारिक रूप से मान लेती है कि—

  • वह विश्वकर्मा समुदाय का हिस्सा है
  • वह उन 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक से जुड़ा है
  • वह योजना में शामिल होने के योग्य है

इसके बाद वह आसानी से:

  • कम ब्याज वाला लोन
  • कौशल प्रशिक्षण
  • टूलकिट सहायता
  • डिजिटल इंसेंटिव
  • और मार्केटिंग सपोर्ट

जैसे सभी लाभ प्राप्त कर सकता है।

3. प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड दोनों रूपों में मिलते हैं—डिजिटल और फिजिकल

सरकार इन दस्तावेज़ों को दो तरीकों से उपलब्ध कराती है:

  • डिजिटल फॉर्म में (मोबाइल/पोर्टल पर)
  • भौतिक फॉर्म में (प्रिंटेड कार्ड और प्रमाण पत्र)

इससे कारीगर के पास हमेशा उसकी पहचान उपलब्ध रहती है—
चाहे मोबाइल में, या फिर उसके पास रखे भौतिक कार्ड में।

विश्वकर्मा योजना के लाभों के मुख्य घटक – आसान भाषा में पूरा विवरण

विश्वकर्मा योजना सिर्फ लोन या ट्रेनिंग देने तक सीमित नहीं है।
सरकार ने इसे कई हिस्सों (Components) में बाँटा है ताकि कारीगरों को हर दिशा से मदद मिल सके—
कौशल, औज़ार, पैसा, बाज़ार और डिजिटल सुविधा—सब कुछ एक ही योजना के अंदर।

मैं इसे एक‑एक करके बेहद आसान भाषा में समझा देता हूँ।

Component 1 – कौशल प्रशिक्षण, मूल्यांकन और दैनिक वजीफा

यह हिस्सा उन कारीगरों के लिए है जो अपने काम को और बेहतर बनाना चाहते हैं।

इसमें शामिल है:

  • कौशल मूल्यांकन (Skill Assessment)
    यानी कारीगर को किस काम में कितनी जानकारी है, यह देखा जाता है।
  • बेसिक ट्रेनिंग (Basic Training)
    5–7 दिन की शुरुआती ट्रेनिंग, जिसमें नए तरीके और आधुनिक काम सिखाए जाते हैं।
  • एडवांस ट्रेनिंग (Advanced Training)
    15 दिन या उससे ज्यादा की गहरी ट्रेनिंग, जो कारीगर को विशेषज्ञ बनाने में मदद करती है।
  • वजीफा (Stipend)
    ट्रेनिंग के दौरान कारीगर को ₹500 प्रतिदिन दिया जाता है, ताकि कमाई रुकने का तनाव न हो।

फंडिंग कैसे होती है?

इस पूरे Component 1 में 100% खर्च MoMSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय) उठाता है।

सारा पैसा सीधे MSDE (कौशल विकास मंत्रालय) द्वारा नियुक्त एजेंसियों को भेजा जाता है।

Component 2 – टूलकिट प्रोत्साहन (Toolkit Incentive)

यह हिस्सा औज़ारों के लिए मदद देने पर केंद्रित है।

इसमें क्या मिलता है?

  • कारीगरों को एक ई‑वाउचर के रूप में ₹15,000 तक की मदद दी जाती है।
  • यह पैसा सिर्फ औज़ार खरीदने के लिए बनाया गया है, ताकि पुराना काम तेज़ और आधुनिक बन सके।

फंडिंग

इस पर भी खर्च 100% MoMSME ही करता है।

Component 3 – किफायती ऋण (Affordable Credit)

यह योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है, क्योंकि कारीगरों को काम बढ़ाने के लिए पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

इसमें क्या मिलता है?

  • कारीगर को कम ब्याज दर (5%) पर ₹3,00,000 तक का लोन मिलता है।
  • लोन दो चरणों में दिया जाता है:
    • पहला चरण: ₹1,00,000
    • दूसरा चरण: ₹2,00,000 (पहली राशि समय पर चुकाने के बाद)

फंडिंग कैसे होती है?

  • CGTMSE (Credit Guarantee Fund) लोन की 100% गारंटी कवरेज देता है।
    जिससे बैंक कारीगर को आसानी से लोन दे पाता है।
  • MoMSME ब्याज सब्सिडी और वार्षिक गारंटी शुल्क खुद उठाता है।
    मतलब कारीगर को अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

पैसा कहाँ जाता है?

  • CGTMSE की तरफ से पैसे बैंकों (MLI) को जाते हैं ताकि लोन सुरक्षित रहे।
  • सरकार सीधे बैंक को ब्याज सब्सिडी भेजती है।

Component 4 – विपणन सहायता (Marketing Support)

कारीगर सामान तो बना लेते हैं, लेकिन बाजार तक पहुँचना मुश्किल होता है।
इसलिए सरकार उन्हें मार्केटिंग सपोर्ट भी देती है।

इसमें कैसे मदद मिलती है?

  • कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए प्लेटफॉर्म, मेलों, ऑनलाइन सहायता और ब्रांडिंग जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं।

फंडिंग

यह पूरा खर्च 100% MoMSME उठाता है।

पैसा कहाँ जाता है?

  • नेशनल मार्केटिंग कमेटी (NCM) द्वारा तय की गई एजेंसी को यह फंड दिया जाता है, जो कारीगरों की मार्केटिंग में मदद करती है।

Component 5 – डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन (Digital Transaction Incentive)

सरकार चाहती है कि कारीगर डिजिटल दुनिया से जुड़े, ताकि लेनदेन आसान हो और व्यवसाय पारदर्शी बने।

इसमें क्या मिलता है?

  • कारीगरों को हर डिजिटल लेनदेन पर ₹1 की प्रोत्साहन राशि मिलती है।
  • उन्हें UPI, QR Code और डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ा जाता है।

फंडिंग

इस हिस्सा भी 100% MoMSME द्वारा फंड किया जाता है।

विश्वकर्मा योजना में आवेदन कैसे करें?

अगर आप प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आवेदन की प्रक्रिया कैसी है और इसे कहाँ से पूरा किया जा सकता है। मैं आपको इसे एक‑एक करके बिल्कुल सरल और दोस्ताना अंदाज़ में समझा देता हूँ।

विश्वकर्मा योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से किया जाता है।
सरकार ने यह तरीका इसलिए चुना है क्योंकि देश में बहुत से कारीगर अभी भी मोबाइल या ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
कई लोग पढ़े‑लिखे नहीं होते, इसलिए उन्हें खुद से ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत हो सकती है।

इसलिए CSC और ग्राम पंचायतें ही उनके लिए पूरी प्रक्रिया संभालती हैं।

विश्वकर्मा योजना का ऑनलाइन पंजीकरण – 4 आसान चरण

योजना में आवेदन कुल चार स्टेप्स में पूरा होता है।
इन चारों को समझ लेते हैं:

1. आधार और मोबाइल नंबर की सत्यापन प्रक्रिया

सबसे पहले कारीगर का आधार नंबर और मोबाइल नंबर वेरिफाई किए जाते हैं।
यह इसलिए जरूरी है ताकि:

  • कारीगर की पहचान सही साबित हो
  • आगे मिलने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुँच सके
  • लोन और ट्रेनिंग से जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल पर जाए

2. कारीगर पंजीकरण (Artisan Registration)

इस स्टेप में कारीगर के बारे में बुनियादी जानकारी दर्ज की जाती है, जैसे—

  • वह कौन‑सा काम करता है
  • कितने समय से काम कर रहा है
  • किस ट्रेड (18 में से किस) से जुड़ा है
  • क्या वह पात्रता शर्तें पूरी करता है या नहीं

यह स्टेप सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कारीगर की पहचान आधिकारिक रूप से योजना में दर्ज हो जाती है।

3. पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र (Certificate)

एक बार पंजीकरण पूरा होने पर कारीगर को
PM Vishwakarma Certificate और ID Card जारी किया जाता है।

ये दस्तावेज़ कारीगर को यह आधिकारिक पहचान देते हैं कि:

  • वह विश्वकर्मा समुदाय का हिस्सा है
  • वह योजना के तहत सभी लाभों के लिए पात्र है

यह प्रमाण पत्र आगे चलकर लोन, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के लिए जरूरी होता है।

4. ऋण के लिए आवेदन (Loan Request)

अंतिम स्टेप में कारीगर:

  • पहले चरण के ऋण (₹1,00,000 तक)
  • और बाद में दूसरे चरण के ऋण (₹2,00,000 तक)

के लिए आवेदन कर सकता है।

CSC सेंटर पूरा फॉर्म भरने में मदद करता है और बैंक की तरफ भेजता है।

CSC और ग्राम पंचायत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

कई कारीगरों के पास:

  • स्मार्टफोन नहीं होता
  • इंटरनेट की सुविधा नहीं होती
  • फॉर्म भरने का अनुभव नहीं होता
  • या डिजिटल प्रक्रिया समझने का समय नहीं होता

इसीलिए सरकार ने आवेदन को CSC/Govt. Centers के माध्यम से उपलब्ध कराया है, ताकि प्रत्येक कारीगर बिना किसी परेशानी के योजना का लाभ आसानी से ले सके।

विश्वकर्मा योजना का रजिस्ट्रेशन कैसे करें? – आसान भाषा में पूरा समझिए

अगर आप प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले इसमें सही तरीके से रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है।
मैं आपको पूरे प्रोसेस को धीरे‑धीरे, बिल्कुल दोस्त की तरह समझा देता हूँ, ताकि आपको किसी भी स्टेप में confusion न हो।

1. सबसे पहले PM Vishwakarma की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ

आपको सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट
pmvishwakarma.gov.in
पर जाना होगा।

जैसे ही साइट खुलेगी, आपको इसका होमपेज दिखाई देगा जहाँ रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध होती है।

2. “पंजीकरण कैसे करें” (How to Register) पर क्लिक करें

होमपेज पर आपको एक विकल्प दिखाई देगा – “पंजीकरण कैसे करें”
इस पर क्लिक करते ही आप एक नए पेज पर पहुँच जाएंगे, जहाँ रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया समझाई गई है।

3. “Artisan” टैब पर क्लिक करें

नए पेज पर आपको कई विकल्प दिखेंगे।
यहाँ आपको “Artisan” टैब पर क्लिक करना है।
यह टैब खास तौर पर कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बनाया गया है, ताकि वे आसानी से रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी देख सकें।

4. रजिस्ट्रेशन की जानकारी वाली PDF देखें

Artisan टैब पर क्लिक करते ही एक PDF फाइल खुलती है।
इस PDF में आपको स्टेप‑बाय‑स्टेप यह बताया गया है कि:

  • रजिस्ट्रेशन कैसे करना है
  • कौन‑कौन से दस्तावेज़ चाहिए
  • कौन सा फॉर्म कहाँ भरा जाता है
  • CSC कैसे प्रक्रिया पूरी करता है

यह गाइड आपके लिए पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देती है।

5. रजिस्ट्रेशन खुद नहीं होता इसके लिए CSC जाना जरूरी है

सबसे ज़रूरी बात यह है कि PM Vishwakarma Yojana में कारीगर खुद से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते
योजना इस तरह बनाई गई है कि रजिस्ट्रेशन केवल CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से ही किया जाए।

इसके पीछे वजह भी बिल्कुल सरल है:

  • कई कारीगर पढ़े‑लिखे नहीं होते
  • मोबाइल/कंप्यूटर चलाना नहीं आता
  • ऑनलाइन फॉर्म में गलती हो सकती है
  • कुछ को इंटरनेट तक पहुँच नहीं होती

इसीलिए सरकार ने CSC को अधिकृत किया है ताकि हर कारीगर आसानी से और सही तरह से योजना में शामिल हो सके।

CSC के कर्मचारी:

  • आपका आधार वेरीफाई करेंगे
  • आपका रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरेंगे
  • आपकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करेंगे
  • प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे
  • और बाद में लोन के आवेदन में भी मदद करेंगे

विश्वकर्मा योजना रजिस्ट्रेशन – आवश्यक दस्तावेज़, समय, शुल्क और स्थिति कैसे चेक करें

अब जब आपको यह समझ आ गया कि रजिस्ट्रेशन CSC के माध्यम से होता है, तो चलिए इससे जुड़े बाकी महत्वपूर्ण सवाल भी आसान भाषा में समझ लेते हैं।

रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज़

योजना में नामांकन करते समय CSC आपसे कुछ दस्तावेज़ माँगेगा।
दस्तावेज़ बहुत भारी‑भरकम नहीं हैं — बस वही चीज़ें जो आपके पास आमतौर पर रहती हैं।

ज़रूरी दस्तावेज़:

  • आधार कार्ड (पहचान सत्यापन के लिए)
  • मोबाइल नंबर (OTP और अपडेट्स के लिए)
  • बैंक अकाउंट विवरण (DBT और लोन के लिए)
  • राशन कार्ड / परिवार पहचान
  • व्यवसाय से जुड़े कोई साधारण प्रमाण (अगर उपलब्ध हो, कई मामलों में CSC स्वयं सत्यापन करता है)

इन दस्तावेज़ों के आधार पर CSC आपका पूरा फॉर्म भर देता है।

रजिस्ट्रेशन में कितना समय लगता है?

आमतौर पर CSC में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बहुत लंबी नहीं होती।
सामान्यतः —

  • आधार सत्यापन: 2–3 मिनट
  • फ़ॉर्म भरना: 10–15 मिनट
  • दस्तावेज़ अपलोड और अंतिम सबमिशन: 5–10 मिनट

मतलब पूरा काम लगभग 20–30 मिनट में पूरा हो सकता है, अगर आपके दस्तावेज़ तैयार हों।

क्या रजिस्ट्रेशन के लिए कोई शुल्क लगता है?

सरकार की तरफ से रजिस्ट्रेशन में कोई शुल्क नहीं लिया जाता
CSC केंद्र कुछ जगहों पर प्रिंट या छोटी सेवा के लिए न्यूनतम शुल्क ले सकते हैं,
लेकिन योजना के लिए सरकार ने कोई फीस तय नहीं की है।

यानी—
योजना में शामिल होना बिल्कुल मुफ्त है।

रजिस्ट्रेशन की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?

रजिस्ट्रेशन होने के बाद आप अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं:

  1. PM Vishwakarma की वेबसाइट पर जाएँ:
    pmvishwakarma.gov.in
  2. “Applicant Status / Track Application” जैसा विकल्प चुनें
  3. अपना आधार नंबरमोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन ID दर्ज करें
  4. आपकी वर्तमान स्थिति स्क्रीन पर दिखाई दे जाएगी

अगर आपका प्रमाण पत्र और ID Card तैयार है, तो वहीं से डाउनलोड भी कर सकते हैं।

विश्वकर्मा योजना – रजिस्ट्रेशन से जुड़े महत्वपूर्ण FAQs

नीचे 10 उपयोगी FAQs दिए हैं जो पाठकों के लिए बहुत काम के होंगे और आपकी पोस्ट को SEO में भी फायदा देंगे।

1. क्या मैं खुद से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकता हूँ?

नहीं, विश्वकर्मा योजना में रजिस्ट्रेशन केवल CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से ही किया जाता है।

2. रजिस्ट्रेशन में कितना समय लगता है?

अगर दस्तावेज़ तैयार हों तो पूरी प्रक्रिया 20–30 मिनट में पूरी हो जाती है।

3. क्या रजिस्ट्रेशन मुफ्त है?

हाँ, सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त है।
CSC केंद्र मामूली सेवा शुल्क ले सकते हैं।

4. क्या हर कारीगर योजना का लाभ ले सकता है?

नहीं, केवल वही कारीगर पात्र हैं जो योजना में शामिल 18 पारंपरिक ट्रेड्स में से किसी एक से जुड़े हैं।

5. क्या आधार कार्ड होना जरूरी है?

हाँ, आधार कार्ड अनिवार्य है क्योंकि सभी वेरिफिकेशन और DBT आधार से ही जुड़े होते हैं।

6. रजिस्ट्रेशन के बाद प्रमाणपत्र कैसे मिलता है?

CSC द्वारा सब्मिशन के बाद आपका PM Vishwakarma Certificate और ID Card डिजिटल और फिजिकल दोनों रूप में प्रदान किया जाता है।

7. क्या आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए?

हाँ, OTP वेरिफिकेशन के लिए मोबाइल का आधार से जुड़ा होना ज़रूरी है।

8. अगर मेरा बैंक अकाउंट KYC नहीं है तो क्या होगा?

KYC अधूरा होने पर DBT और लोन दोनों में दिक्कत हो सकती है।
पहले बैंक में जाकर KYC पूरा करवाएं।

9. क्या रजिस्ट्रेशन के बाद तुरंत लोन मिल जाता है?

नहीं, पहले आपको प्रमाण पत्र और ID जारी होती है, फिर आप पहले चरण के लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

10. क्या एक परिवार से दो लोग योजना में शामिल हो सकते हैं?

नहीं, एक परिवार (पति, पत्नी, अविवाहित बच्चे) से केवल एक सदस्य ही इस योजना का लाभ ले सकता है।

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