Vishwakarma Yojana 2025 Eligibility (PM Vishwakarma 18 Trade List / Beneficiaries) – विश्वकर्मा योजना के लिए कौन कर सकता है आवेदन?

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है? कौन कौन लोग इस योजना का लाभ उठाने के पात्र हैं? जानिए PM विश्वकर्मा योजना की 18 trades की लिस्ट जिनके तहत शामिल कारीगर या शिल्पकार इस योजना के तहत सस्ती ब्याज दरों वाला ऋण लाभ और ट्रैनिंग लेने के लिए आवेदन सकते हैं।

विश्वकर्मा योजना पात्रता मानदंड

देखो, अगर कोई कारीगर या शिल्पकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का फायदा लेना चाहता है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस योजना के लिए कौन‑कौन योग्य माना जाता है।
मैं तुझे बिल्कुल सिंपल और आराम से समझा देता हूँ, जैसे दो दोस्त बैठकर बात कर रहे हों।

सबसे पहले तो यह जान लो कि यह योजना पूरे देश के उन कारीगरों के लिए बनाई गई है जो अपने हाथों के हुनर से काम करते हैं। सरकार ने 18 पारंपरिक व्यवसायों को इसमें शामिल किया है, और अगर कोई व्यक्ति इनमें से किसी एक से भी जुड़ा है, तो वह इस योजना का लाभ लेने का हकदार बन जाता है।
मतलब यह हुआ कि eligibility का सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम यही है कि कारीगर का नाम इन 18 trades में से किसी एक में आता हो।

यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के कारीगरों पर लागू होती है।
फर्क नहीं पड़ता कि कोई गाँव में छोटा काम करता है या शहर में दुकान चलाता है—अगर काम पारंपरिक कौशल पर आधारित है, तो योजना उसके लिए है।

मान्यता कैसे मिलेगी?

इस योजना में कारीगर को सरकार की तरफ से एक तरह की आधिकारिक पहचान भी दी जाती है।
योजना के तहत आवेदनकर्ता को मिलता है:

  • PM Vishwakarma Certificate
  • PM Vishwakarma ID Card

दोनों मिलकर यह साबित करते हैं कि व्यक्ति असल में कारीगर है और योजना के हर लाभ के लिए पात्र है।
यह पहचान ही आगे आने वाले सभी फायदों की चाबी है।

लोन कितने का मिलता है?

अब बात करते हैं उस चीज़ की, जिसकी वजह से ज़्यादातर कारीगर इस योजना में रुचि लेते हैं—लोन।

सरकार इस योजना में दो चरणों में ऋण देती है:

  • पहली किस्त: 1 लाख रुपये तक
  • दूसरी किस्त: 2 लाख रुपये तक

और सबसे अच्छी बात — ब्याज दर सिर्फ 5 प्रतिशत सालाना है, जो आमतौर पर मिलने वाले बाजार दरों से काफी कम है।

सिर्फ लोन ही नहीं, बल्कि पूरी मदद

इस योजना में फायदा सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है।
कारीगर को आगे बढ़ाने के लिए सरकार कई और सुविधाएँ भी देती है, जैसे:

  • Skill Training – यानी नई तकनीक और बेहतर काम सीखने का मौका
  • Toolkit Incentive – काम के लिए जरूरी औज़ार खरीदने की सहायता
  • Digital Transactions पर प्रोत्साहन – ताकि कारीगर ऑनलाइन पेमेंट से जुड़ सकें
  • Marketing Support – जिससे उनके काम को बाजार में पहचान और ग्राहक मिल सकें

मतलब सरकार कारीगर को केवल पैसा ही नहीं देती, बल्कि उसे हुनर, औज़ार, बाजार और आधुनिक सुविधाएँ—all-round support देती है, ताकि उसकी कमाई और काम दोनों बढ़ें।

पीएम विश्वकर्मा योजना 2025 – पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

अब मैं आपको बिल्कुल आसान भाषा में समझाता हूँ कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना 2025 का फायदा लेने के लिए किन‑किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसे ऐसे समझिए जैसे कोई दोस्त आपको बैठकर पूरी प्रक्रिया समझा रहा हो।

1. कारीगर या शिल्पकार होना जरूरी है

इस योजना का लाभ केवल उन लोगों को दिया जाएगा जो अपने हाथों और औज़ारों से काम करते हैं और उन 18 पारंपरिक परिवार‑आधारित व्यवसायों में से किसी एक से जुड़े हैं।
साथ ही, व्यक्ति असंगठित क्षेत्र में स्व-रोज़गार (self‑employment) के रूप में काम कर रहा हो — यानी अपनी मेहनत और हुनर से रोज़गार चला रहा हो।

2. न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए

योजना में आवेदन करते समय लाभार्थी की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए।
इससे यह सुनिश्चित होता है कि आवेदनकर्ता कानूनी रूप से काम करने योग्य है और अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार भी।

3. आवेदन की तारीख पर उसी काम में सक्रिय होना चाहिए

जिस काम (trade) से आप योजना में आवेदन कर रहे हैं, आप उस काम को आवेदन की तारीख तक कर रहे हों।
अगर आप उस समय किसी दूसरे काम में हैं, तो आवेदन मान्य नहीं माना जाएगा।

साथ ही, पिछले 5 सालों में आप ने केंद्र या राज्य सरकार की निम्न योजनाओं से कोई लोन नहीं लिया हो:

  • PMEGP
  • PM SVANidhi
  • Mudra Loan
  • या कोई भी इसी तरह की क्रेडिट-आधारित योजना

अगर आपने इन योजनाओं से पहले लोन लिया है, तो विश्वकर्मा योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

4. एक परिवार से सिर्फ एक व्यक्ति लाभ ले सकता है

सरकार ने साफ नियम बनाया है कि एक परिवार में केवल एक सदस्य ही इस योजना का फायदा ले सकता है।
यहाँ परिवार का मतलब है:

  • पति
  • पत्नी
  • अविवाहित बच्चे

यदि परिवार के किसी सदस्य ने पहले ही योजना का लाभ ले लिया है, तो दूसरा सदस्य आवेदन नहीं कर सकता।

5. सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं हैं

अगर कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी में है या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है, तो वे इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे
यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए बनी है जिनकी आजीविका पूरी तरह कारीगरी और छोटे व्यवसाय पर निर्भर है।

PM Vishwakarma Yojana Online Apply

अगर आप इन सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो योजना में ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है —
लेकिन पूरे प्रोसेस को CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से ही पूरा किया जाता है।

पीएम विश्वकर्मा योजना – 18 ट्रेड की पूरी लिस्ट (दोस्त की तरह समझिए)

देखो, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना खास तौर पर उन कारीगरों के लिए बनाई गई है जिनका काम पीढ़ियों से चलता आ रहा है।
सरकार ने इसके पहले चरण में 18 पारंपरिक कारीगरी वाले कामों को चुना है।
अगर कोई व्यक्ति इनमें से किसी एक काम से भी जुड़ा है, तो वह इस योजना में शामिल हो सकता है।

मैं तुझे इन 18 व्यवसायों को एक‑एक करके आसान भाषा में समझा देता हूँ, ताकि बात बिल्कुल साफ हो जाए।


1. बढ़ई (सुथार)

जो लकड़ी से फर्नीचर, दरवाज़े, चौखट या अन्य लकड़ी का काम करते हैं।

2. नाव बनाने वाले

वे कारीगर जो छोटी या बड़ी नावें तैयार करते हैं।

3. अस्त्र या कवच बनाने वाले

ऐसे लोग जो लोहे या धातु से पारंपरिक हथियार या सुरक्षा कवच बनाते हैं।

4. लोहार

लोहे का हर तरह का काम—उपकरण बनाना, मरम्मत करना या उससे सामान तैयार करना।

5. हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले

जो रोज़मर्रा के काम में आने वाले औज़ार और उपकरण तैयार करते हैं।

6. ताला बनाने वाले (Locksmith)

जो ताले और उनसे जुड़े उपकरण बनाते या ठीक करते हैं।

7. सुनार (Goldsmith)

जो सोने‑चांदी के ज़ेवर बनाते हैं या उन पर काम करते हैं।

8. कुम्हार

मिट्टी से बर्तन, घड़े, दीये, या अन्य पारंपरिक वस्तुएँ बनाने वाले कारीगर।

9. मूर्तिकार / पत्थर कलाकार / पत्थर तोड़ने वाले

जो पत्थर पर नक्काशी करते हैं, मूर्तियाँ बनाते हैं या पत्थर तोड़ने का काम करते हैं।

10. मोची / जूता कारीगर

जूते बनाना, सिलाई, मरम्मत—इनसे जुड़े सभी तरह के काम।

11. राजमिस्त्री (Mason)

इंट‑गारे का काम, दीवार बनाना, प्लास्टर करना और अन्य घर‑निर्माण से जुड़ी कारीगरी।

12. टोकरी / चटाई / झाड़ू बनाने वाले / जूट बुनकर

हाथ से बनी टोकरी, चटाई, झाड़ू या बुनाई का काम करने वाले।

13. गुड़िया और पारंपरिक खिलौने बनाने वाले

जो लोक शैली में गुड़िया या लकड़ी/मिट्टी के खिलौने बनाते हैं।

14. नाई

बाल काटने, शेविंग करने या इससे जुड़े अन्य grooming कामों में लगे कारीगर।

15. माला बनाने वाले (Malakaar)

फूलों या अन्य सामग्री से माला तैयार करने का पारंपरिक काम।

16. धोबी

कपड़े धोने, इस्त्री करने और संबंधित सेवाएँ देने वाले।

17. दर्जी

कपड़े सिलने, नाप लेने, डिजाइन बनाने जैसे काम करने वाले।

18. मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले

हाथ से जाल तैयार करने वाले कारीगर—जो मछुआरों के लिए जरूरी उपकरण बनाते हैं।

PM Vishwakarma Yojana – 18 ट्रेड की लिस्ट और आसान भाषा में पूरी जानकारी

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में सरकार ने उन कारीगरों को शामिल किया है जो सालों से अपने हाथों और पारंपरिक औज़ारों से काम करके जीवन चला रहे हैं।
ये सभी काम भारत की पुरानी कला, परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।

नीचे मैं हर ट्रेड को बहुत सरल तरीके से समझा रहा हूँ, ताकि कोई भी व्यक्ति आसानी से पहचान सके कि उसका काम इसमें आता है या नहीं।

1. बढ़ई (सुथार / बढ़ई कारिगर)

ये वे लोग होते हैं जो लकड़ी से फर्नीचर, दरवाज़े, चौखट, खिड़कियाँ या किसी भी तरह का लकड़ी का सामान बनाते हैं।
अधिकतर ये कारीगर अपने छोटे वर्कशॉप या घर पर ही काम करते हैं।

2. लोहार (Blacksmith)

लोहे, पीतल, तांबे या कांसे जैसी धातुओं को गर्म करके, पीटकर और मोड़कर औज़ार बनाने का काम करते हैं।
ये कुदाल, फावड़ा, कुल्हाड़ी जैसे रोजमर्रा के औज़ार भी बनाते हैं।

3. नाव बनाने वाले (Boat Maker)

ये कारीगर लकड़ी से छोटी‑बड़ी नावें बनाते, जोड़ते और उनकी मरम्मत करते हैं।
मुख्य रूप से किनारे वाले क्षेत्रों में ये काम होता है।

4. कवच या अस्त्र बनाने वाले (Armourer)

ये पारंपरिक रूप से तलवार, ढाल, छोटे हथियार, हेलमेट आदि बनाते हैं।
ये काम अभी भी कई शहरों और गाँवों में छोटे स्तर पर किया जाता है।

5. हथौड़ा और टूलकिट निर्माता

ये वे कारीगर होते हैं जो धातु को गर्म करके हथौड़े, प्लायर और अन्य औज़ार तैयार करते हैं।

6. ताला बनाने वाले (Locksmith)

ये सड़क किनारे छोटी दुकानों पर ताले बनाते, ठीक करते या चाबी तैयार करते हैं।
अक्सर हाथ से और पुराने औज़ारों से ही पूरा काम कर लिया जाता है।

7. सुनार (Goldsmith / Sonar)

सोने‑चाँदी के गहने डिजाइन करना, बनाना और मरम्मत करना इनका मुख्य काम है।
ये कारीगर बेहद नाजुक और बारीक काम करते हैं।

8. मूर्तिकार / पत्थर तराशने वाले / Stone Breaker

ये लोग पत्थर को तराशकर मूर्तियाँ, खंभे या सजावटी सामान बनाते हैं।
गाँव, मंदिर और घरों में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें इनके हाथों से बनती हैं।

9. कुम्हार (Potter)

ये मिट्टी से दीये, घड़े, गमले, हांडी और अन्य बर्तन बनाते हैं।
यह काम चाक पर घुमाकर और फिर भट्टी में पकाकर किया जाता है।

10. मोची / जूता बनाने वाले (Cobbler / Footwear Artisan)

ये लोग जूते‑चप्पल बनाते हैं, सिलाई करते हैं या पुराने जूते ठीक करते हैं।
इनकी दुकानें अक्सर सड़क किनारे या छोटे बाज़ारों में मिलती हैं।

11. टोकरी, चटाई, झाड़ू और जूट उत्पाद बनाने वाले

ये कारीगर बाँस, घास या जूट से टोकरी, चटाई, झाड़ू आदि बनाते हैं।
यह काम पूरी तरह हाथों और सरल उपकरणों से होता है।

12. राजमिस्त्री (Mason / Rajmistri)

ये इंट‑गारे का काम, भवन निर्माण, प्लास्टर, और दीवारें खड़ी करने जैसे कार्य करते हैं।
अक्सर ये निर्माण स्थल पर ही काम करते हैं।

13. नाई (Barber / Naai)

ये बाल काटने, दाढ़ी बनाने और अन्य grooming सेवाएँ प्रदान करते हैं।
शहर‑गाँव दोनों जगह इनका काम बेहद जरूरी है।

14. गुड़िया और पारंपरिक खिलौने बनाने वाले

ये लकड़ी, मिट्टी, धागे या कपड़े से हाथों से खिलौने तैयार करते हैं।
भारत के कई राज्यों में यह एक पुराना पारिवारिक व्यवसाय है।

15. माला बनाने वाले (Malakaar)

ये कारीगर फूलों या अन्य सजावटी चीज़ों से माला बनाते हैं।
त्योहारों, शादियों और धार्मिक आयोजनों में इनका काम बहुत उपयोगी होता है।

16. धोबी (Washerman / Dhobi)

ये कपड़े धोने, सुखाने और इस्त्री करने का काम करते हैं।
अक्सर यह काम पारंपरिक तरीकों से किया जाता है।

17. दर्जी (Tailor / Darzi)

ये लोग सिलाई मशीन और हाथ के औज़ारों से कपड़े सिलने, काटने या बदलने का काम करते हैं।
शहर और गाँव दोनों जगह दर्जी की मांग हमेशा रहती है।

18. मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले (Fishing Net Maker)

ये कारीगर रस्सी, धागे या जूट से हाथ से जाल बुनते हैं।
मछली पकड़ने वाले समुदाय के लिए यह एक पारंपरिक और जरूरी पेशा है।

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